मध्य प्रदेश को आज देश में “गेहूं का कटोरा” कहा जाने लगा है। जब भी गेहूं उत्पादन की बात होती है, तो पंजाब और हरियाणा के साथ अब मध्य प्रदेश का नाम भी गर्व से लिया जाता है। राज्य का गेहूं न सिर्फ देश के बड़े बाजारों में पहुंचता है, बल्कि विदेशों में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
खेतों में लहलहाती सुनहरी बालियां, आधुनिक सिंचाई व्यवस्था और मेहनती किसान ये तीन बातें मिलकर मध्य प्रदेश को गेहूं उत्पादन में अग्रणी बनाती हैं। लेकिन इस बड़े रिकॉर्ड के पीछे कुछ खास जिलों की सबसे बड़ी भूमिका है। ये जिले हर साल प्रदेश की कुल उपज में बड़ा योगदान देते हैं और सरकारी खरीदी में भी आगे रहते हैं।
मध्य प्रदेश में गेहूं उत्पादन
मध्य प्रदेश में गेहूं प्रमुख रबी फसल है। यहां की काली और उपजाऊ मिट्टी, पर्याप्त सिंचाई व्यवस्था और अनुकूल मौसम गेहूं की खेती के लिए आदर्श माने जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने गेहूं उत्पादन के मामले में नए कीर्तिमान बनाए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, समर्थन मूल्य पर खरीदी में भी मध्य प्रदेश लगातार शीर्ष राज्यों में शामिल रहा है।
मध्य प्रदेश का शरबती और ड्यूरम गेहूं अपनी गुणवत्ता के कारण देश-विदेश में पसंद किया जाता है। यहां का गेहूं दाने में बड़ा, चमकदार और पोषण से भरपूर होता है। यही वजह है कि महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात और दक्षिण भारत के राज्यों में भी इसकी भारी मांग रहती है। अब आइए जानते हैं वे पांच जिले, जिन्हें मध्य प्रदेश में गेहूं उत्पादन का मजबूत स्तंभ माना जाता है।
नर्मदापुरम
नर्मदा नदी के किनारे बसा नर्मदापुरम जिला गेहूं उत्पादन में मध्य प्रदेश का अग्रणी जिला माना जाता है। यहां सिंचाई के लिए नर्मदा का पानी बड़ी भूमिका निभाता है। पर्याप्त जल उपलब्धता के कारण यहां किसानों को फसल की चिंता कम रहती है।
इस जिले में उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं की कई किस्में बोई जाती हैं। खासतौर पर लोकवन और अन्य उन्नत किस्में यहां खूब होती हैं। मिट्टी में नमी और पोषक तत्वों की अच्छी मात्रा गेहूं के दानों को मजबूत और भारी बनाती है। यही कारण है कि सरकारी खरीदी केंद्रों पर यहां की उपज बड़ी मात्रा में पहुंचती है।
सीहोर
राजधानी भोपाल से सटा सीहोर जिला शरबती गेहूं के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। सीहोर का शरबती गेहूं अपने सुनहरे रंग और मीठे स्वाद के कारण खास माना जाता है। इसे जीआई टैग भी मिल चुका है, जिससे इसकी पहचान और मजबूत हुई है।
नर्मदा नदी के प्रभाव और काली मिट्टी की वजह से यहां की जमीन बेहद उपजाऊ है। मिट्टी में पोटाश और नमी की अच्छी मात्रा दानों को बड़ा और चमकदार बनाती है। इसी वजह से सीहोर को कई बार ‘गोल्डन ग्रेन’ क्षेत्र भी कहा जाता है। गेहूं उत्पादन में इस जिले की भूमिका बेहद अहम है।
रायसेन
रायसेन जिला भी गेहूं उत्पादन में अग्रणी जिलों में गिना जाता है। खासतौर पर उदयपुरा और सिलवानी क्षेत्र गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए जाने जाते हैं। यहां की काली मिट्टी गेहूं के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
किसानों ने आधुनिक तकनीक और उन्नत बीजों का उपयोग शुरू कर दिया है, जिससे उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है। बाजार में रायसेन के गेहूं की मांग अच्छी रहती है, क्योंकि इसकी गुणवत्ता स्थिर और भरोसेमंद मानी जाती है।
विदिशा
विदिशा जिले में काली और जलोढ़ मिट्टी दोनों पाई जाती हैं। बेतवा नदी की वजह से यहां सिंचाई की सुविधा अच्छी है। यही कारण है कि यहां शरबती और ड्यूरम गेहूं का उत्पादन बड़े स्तर पर होता है।
विदिशा का गेहूं ग्लूकोज और सुक्रोज की अच्छी मात्रा के लिए जाना जाता है, जिससे रोटियां मुलायम बनती हैं। गेहूं उत्पादन के साथ-साथ यहां की सरकारी खरीदी भी लगातार बढ़ रही है। यह जिला प्रदेश की कुल उपज में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
उज्जैन
मालवा क्षेत्र का उज्जैन जिला भी अब गेहूं उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां की जलवायु और मिट्टी दोनों गेहूं के अनुकूल हैं। क्षिप्रा नदी के कारण सिंचाई की सुविधा उपलब्ध रहती है।
उज्जैन में गेहूं खरीदी का आंकड़ा हर साल बढ़ रहा है। किसान नई तकनीक अपना रहे हैं और फसल प्रबंधन पर ध्यान दे रहे हैं। इससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार हुआ है।
क्यों खास है मध्य प्रदेश का गेहूं?
मध्य प्रदेश का गेहूं इसलिए खास है क्योंकि यहां की प्राकृतिक परिस्थितियां खेती के लिए अनुकूल हैं। काली मिट्टी, पर्याप्त नमी, नदियों का जाल और संतुलित मौसम मिलकर फसल को मजबूत बनाते हैं।
राज्य सरकार भी किसानों को समर्थन मूल्य, उन्नत बीज और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराती है। इससे उत्पादन में स्थिरता बनी रहती है। गेहूं उत्पादन में मध्य प्रदेश की बढ़ती हिस्सेदारी देश की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत करती है।






