
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह जिम्मेदारी उन्हें तब मिली जब महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति चुने गए और उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 11 सितंबर को आधिकारिक आदेश जारी कर देवव्रत को महाराष्ट्र का कार्यभार सौंपा। आदेश में कहा गया कि आचार्य देवव्रत अपने मौजूदा कर्तव्यों के साथ महाराष्ट्र के राज्यपाल के कार्य भी संभालेंगे। उन्हें सोमवार, 15 सितंबर को सुबह 11 बजे मुंबई के राजभवन में शपथ दिलाई जाएगी।
आचार्य देवव्रत अपनी पत्नी दर्शना देवी के साथ रविवार सुबह अहमदाबाद से तेजस एक्सप्रेस ट्रेन में सवार होकर मुंबई के लिए रवाना हुए। उनकी इस यात्रा की तस्वीरें और वीडियो महाराष्ट्र राज्यपाल कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए। पोस्ट में लिखा गया कि गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, जिन्हें महाराष्ट्र के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, मुंबई की ओर रवाना हो गए हैं। इन तस्वीरों में आचार्य देवव्रत और उनकी पत्नी को ट्रेन में आरामदायक सफर करते हुए दिखाया गया।
आचार्य देवव्रत 15 सितंबर को लेंगे शपथ
सीपी राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद महाराष्ट्र में राज्यपाल का पद खाली हो गया था। इस पर राष्ट्रपति ने त्वरित निर्णय लेते हुए गुजरात के राज्यपाल को अतिरिक्त जिम्मेदारी देने का फैसला किया। राष्ट्रपति भवन की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि यह नियुक्ति अंतरिम व्यवस्था के तौर पर है और देवव्रत दोनों राज्यों की जिम्मेदारी निभाएंगे। आईएएनएस के अनुसार, राष्ट्रपति के प्रेस सचिव अजय कुमार सिंह ने इस नियुक्ति की पुष्टि की और कहा कि यह फैसला प्रशासनिक सुचारुता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
आचार्य देवव्रत का अनुभव काफी व्यापक रहा है। वे जुलाई 2019 से गुजरात के राज्यपाल के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे अगस्त 2015 से जुलाई 2019 तक हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रह चुके हैं। उन्हें शिक्षा, प्रशासन और सामाजिक कार्यों में अनुभव रखने वाला राज्यपाल माना जाता है। महाराष्ट्र जैसे बड़े और जटिल राज्य की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आना उनके अनुभव और कौशल पर भरोसे को दर्शाता है। अब वे गुजरात और महाराष्ट्र, दोनों राज्यों के संवैधानिक मामलों की निगरानी करेंगे और राज्यपाल के रूप में अपनी नई जिम्मेदारियां निभाएंगे।
