मुंबई और पुणे के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए जरूरी खबर है। महाराष्ट्र की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना का काम लगभग पूरा हो चुका है। महाराष्ट्र दिवस यानि 1 मई को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इसका उद्घाटन करेंगे। इसके बाद यह आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।
बता दें कि इस परियोजना की अनुमानित लागत 6,700 करोड़ है। इसे साल 2019 में मंजूरी दी गई थी। इसे खास तौर पर पुराने खंडाला घाट के घुमावदार और जाम वाले रास्ते को बायपास करने के लिए बनाया गया है। वहीं राहत की बात यह है कि इतने बड़े और महंगे प्रोजेक्ट के बावजूद यात्रियों को कोई अतिरिक्त टोल नहीं देना होगा।
‘मिसिंग लिंक’ परियोजना की खासियत
‘मिसिंग लिंक’ परियोजना आधुनिक इंजीनियरिंग का एक शानदार उदाहरण है, जिसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के बावजूद सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। तेज हवाओं, भारी बारिश और चुनौतीपूर्ण भू-आकृतिक स्थितियों के बीच इसका निर्माण किया गया, जो इसकी तकनीकी मजबूती को दर्शाता है।
करीब 10.5 किलोमीटर लंबे इस परियोजना में दो विशाल सुरंगें, ऊंचे पुल (वायाडक्ट) और टाइगर वैली के ऊपर लगभग 182 मीटर ऊंचा एक केबल-स्टेड पुल शामिल है। इसकी एक सुरंग लगभग 23.75 मीटर चौड़ी है, जिसे दुनिया की सबसे चौड़ी सुरंगों में गिना जाता है।
MSRDC द्वारा तैयार किए गए इस परियोजना में निर्माण के दौरान 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं और लगातार बारिश जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ा। खास बात यह है कि इनमें से एक सुरंग सीधे लोणावला झील के नीचे से होकर गुजरती है, जो इस परियोजना की इंजीनियरिंग क्षमता को और भी खास बनाती है।
एकनाथ शिंदे ने किया परियोजना का निरीक्षण
रविवार को राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस परियोजना का निरीक्षण किया। उन्होंंने बताया कि मुंबई-पुणे ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना का 99% काम अब पूरा हो गया है, और इससे घाट सेक्शन में ट्रैफिक की भीड़ काफी कम हो जाएगी, जिससे सफर तेज और सुरक्षित हो जाएगा। इससे लोगों को घाट ट्रैफिक जाम से छुटकारा मिलेगा, और तेज परिवहन को बढ़ावा मिलने से इकॉनमी को भी बढ़ावा मिलेगा।
एकनाथ शिंदे ने विश्वास जताया कि ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना मुंबई और पुणे के बीच यात्रा को अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाएगी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल यातायात व्यवस्था में सुधार लाएगी, बल्कि राज्य के समग्र विकास को भी नई गति देगी।
मिसिंग लिंक परियोजना शुरू होने के बाद टोल नहीं बढ़ेगा। इस मौके पर साफ तौर पर कहा गया कि चार पहिया गाड़ियों और बसों को प्राथमिकता दी जाएगी। भारी वाहन और खतरनाक सामग्री ले जाने वाले वाहन फिलहाल पुराने घाट मार्ग का ही उपयोग करेंगे।





