देश की सबसे अमीर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में पार्षद चुनाव के बाद अब मेयर और डिप्टी मेयर चुनने की प्रक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यह चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि मुंबई को करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद एक निर्वाचित मेयर मिलने जा रहा है। अब तक BMC का कामकाज राज्य सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक देख रहे थे।
मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों में नगर निगम के चुनाव केवल शहर तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि इनका असर राज्य और देश की राजनीति पर भी पड़ता है। BMC का विशाल बजट और उसका राजनीतिक महत्व इसे हमेशा चर्चा में रखता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि यहां मेयर का चुनाव कैसे होता है और इस पद की क्या अहमियत है।
कैसे होता है मेयर का चुनाव?
महाराष्ट्र के नगर निकायों, खासकर मुंबई में, मेयर का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं किया जाता है। प्रक्रिया अप्रत्यक्ष होती है। सबसे पहले, मुंबई की जनता अपने-अपने वार्ड से पार्षदों (काउंसलर) को चुनती है। BMC में कुल 227 वार्ड हैं, यानी 227 पार्षद चुने जाते हैं।
ये सभी निर्वाचित पार्षद मिलकर BMC सदन का गठन करते हैं। इसके बाद, यही पार्षद अपने बीच से किसी एक को मेयर और दूसरे को डिप्टी मेयर के लिए वोट देते हैं। जिस पार्टी या गठबंधन के पास सबसे ज्यादा पार्षद होते हैं, आमतौर पर मेयर उसी का बनता है।
बहुमत के लिए कितने पार्षद जरूरी?
मुंबई का मेयर बनने के लिए किसी भी राजनीतिक दल या गठबंधन को BMC सदन में बहुमत साबित करना होता है। 227 सीटों वाले सदन में बहुमत का जादुई आंकड़ा 114 है। जिस भी पक्ष के पास 114 या उससे अधिक पार्षदों का समर्थन होता है, वह अपना मेयर और डिप्टी मेयर आसानी से चुन लेता है। इस बार के चुनाव में करीब 1,700 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें 879 महिलाएं और 821 पुरुष शामिल थे।
ढाई साल का होता है मेयर का कार्यकाल
मुंबई की एक और खास बात यहां मेयर का कार्यकाल है। जहां पार्षदों का कार्यकाल पूरे 5 साल का होता है, वहीं मेयर का कार्यकाल सिर्फ 2.5 साल का होता है। इसका मतलब है कि एक ही 5 साल के कार्यकाल के दौरान पार्षद दो बार मेयर के चुनाव में मतदान करते हैं। इससे राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की गुंजाइश बनी रहती है।
चार साल बाद क्यों हो रहा है चुनाव?
साल 2017 में हुए BMC चुनाव के बाद चुनी गई नगर पालिका का कार्यकाल मार्च 2022 में समाप्त हो गया था। इसके बाद से ही BMC का कामकाज एक प्रशासक के हाथ में था, जिनकी नियुक्ति राज्य सरकार ने की थी। अब चार साल बाद शहर को एक बार फिर निर्वाचित प्रतिनिधि और मेयर मिलेंगे, जिससे उम्मीद है कि रुके हुए विकास कार्यों में तेजी आएगी।





