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महाराष्ट्र कैबिनेट बैठक: धर्मांतरण विरोधी कानून को राज्य सरकार की मंजूरी, अब विधानसभा में पेश किया जाएगा बिल

Written by:Gaurav Sharma
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महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार की कैबिनेट बैठक में जबरन धर्मांतरण से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसे अब विधानसभा में पेश किया जाएगा। सरकार के अनुसार प्रस्तावित कानून में जबरन, धोखे या लालच से धर्म परिवर्तन को गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इसी बैठक में किसानों की कर्जमाफी पर 30 जून तक निर्णय लेने की समय-सीमा भी तय की गई।
महाराष्ट्र कैबिनेट बैठक: धर्मांतरण विरोधी कानून को राज्य सरकार की मंजूरी, अब विधानसभा में पेश किया जाएगा बिल

गुरुवार को हुई महाराष्ट्र कैबिनेट बैठक में दो बड़े फैसले सामने आए-पहला, जबरन धर्मांतरण के खिलाफ नए विधेयक को मंजूरी; दूसरा, किसानों की कर्जमाफी पर तय समयसीमा के भीतर निर्णय का भरोसा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद सरकार ने संकेत दिया कि सामाजिक और कृषि, दोनों मोर्चों पर नीति-स्तर पर तेज़ कदम उठाए जा रहे हैं।

कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब धर्मांतरण विरोधी विधेयक को विधानसभा में पेश किया जाएगा। वहां से विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित प्रावधानों में जबरन, प्रलोभन देकर या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने को गैर-जमानती अपराध माना जाएगा, और ऐसे मामलों में तत्काल गिरफ्तारी का प्रावधान रखा गया है।

धर्मांतरण विरोधी कानून पर सरकार का रुख

मंत्री नितेश राणे ने कहा कि राज्य में लंबे समय से ऐसे कानून की मांग की जा रही थी। उनके अनुसार, हिंदुत्व संगठनों और समर्थकों ने इस मुद्दे पर वर्षों तक अभियान चलाए। कैबिनेट के फैसले को उन्होंने इसी मांग का नीतिगत परिणाम बताया।

“आज देवा भाऊ के महाराष्ट्र में कैबिनेट ने देश का सबसे सख्त एंटी-कन्वर्जन कानून मंजूर किया है।”- नितेश राणे

राणे ने यह भी कहा कि प्रस्तावित कानून को गुजरात और मध्य प्रदेश के प्रावधानों से अधिक कठोर बनाया गया है। हालांकि, उन्होंने तकनीकी प्रावधानों का विस्तृत ब्यौरा जल्द सार्वजनिक किए जाने की बात कही। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गिरफ्तारी और जमानत से जुड़े प्रावधान इस विधेयक की केंद्रीय विशेषता हैं।

कानून के स्तर पर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कैबिनेट मंजूरी के बाद भी विधेयक को विधानसभा की प्रक्रिया से गुजरना होगा। यानी अंतिम कानूनी स्वरूप सदन में चर्चा और पारित होने के बाद ही तय होगा। इसलिए आने वाले दिनों में इस बिल की धाराएं, परिभाषाएं और प्रवर्तन की प्रक्रिया राजनीतिक और कानूनी विमर्श का विषय रहेंगी।

किसानों के लिए 30 जून तक निर्णय का संकेत

इसी बैठक में कृषि क्षेत्र से जुड़ा दूसरा महत्वपूर्ण संकेत दिया गया। कृषि मंत्री दत्तात्रेय भारणे ने कहा कि कर्जमाफी पर ऐतिहासिक फैसला 30 जून तक लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस विषय पर बनी उच्चस्तरीय समिति अप्रैल के पहले सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर अंतिम घोषणा की जाएगी।

भारणे ने यह भी कहा कि सरकार सिर्फ कर्जमाफी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि कृषि व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में समानांतर नीतियां भी तैयार की जा रही हैं। इनमें मौसम और कीट-पतंगों को लेकर चेतावनी तंत्र जैसे उपाय शामिल करने की बात कही गई। इस संकेत से साफ है कि राहत और संरचनात्मक सुधार, दोनों पर एक साथ काम करने की रणनीति अपनाई जा रही है।

राज्य सरकार का दावा है कि धर्मांतरण विरोधी प्रस्ताव सामाजिक सुरक्षा के ढांचे को मजबूत करेगा, जबकि कर्जमाफी और कृषि समर्थन उपाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देंगे। अब नजर विधानसभा में विधेयक की प्रगति और कर्जमाफी पर समिति की रिपोर्ट के बाद होने वाली औपचारिक घोषणा पर रहेगी।

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