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ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार पर उद्धव गुट ने दी नसीहत, कहा – ‘अब हार-जीत का दौर समाप्त हो चुका है’

Written by:Ankita Chourdia
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पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार पर शिवसेना (यूबीटी) ने उन्हें संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करने की सलाह दी है। चलिए जानते है यह पूरा मामला क्या है?
ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार पर उद्धव गुट ने दी नसीहत, कहा – ‘अब हार-जीत का दौर समाप्त हो चुका है’

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार पर शिवसेना (यूबीटी) ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसके प्रवक्ता आनंद दुबे ने लोकतंत्र की संवैधानिक प्रक्रिया का महत्व समझाया है। दरअसल, पश्चिम बंगाल चुनाव में पराजय के उपरांत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार (6 मई) को विधायकों के साथ एक बैठक आयोजित की थी, जिसमें उन्होंने एक बार फिर अपनी यह दृढ़ता व्यक्त की कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी, बल्कि उन्हें पद से हटाने दिया जाए। इस बैठक के बाद ही शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र का मूल सिद्धांत संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करना होता है।

दरअसल आनंद दुबे ने साफ किया कि संविधान यह निर्धारित करता है कि प्रत्येक पांच वर्ष के अंतराल पर सरकारें परिवर्तित होती हैं, यदि कोई दल चुनाव में विजय प्राप्त करता है तो वह पुनः सरकार का गठन करता है और यदि पराजित होता है तो उसे अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ‘दिल पर पत्थर रखकर कभी-कभी समझौते करने पड़ते हैं’, यह एक ऐसी सच्चाई है जिसे राजनीतिक जीवन में स्वीकार करना आवश्यक हो जाता है।

आनंद दुबे ने क्या कहा?

आनंद दुबे ने आगे बताया कि ममता दीदी ने संभवतः भावनाओं में बहकर यह बात कही है, क्योंकि उनका पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव रहा है। वे विगत पंद्रह वर्षों से लगातार चुनाव जीतती आ रही थीं और मुख्यमंत्री के रूप में सफलतापूर्वक कार्य कर रही थीं। ऐसे में, अचानक मिली हार के उपरांत यह स्वाभाविक है कि कोई व्यक्ति यह सोचे कि ‘मैं कुर्सी नहीं छोड़ूंगी, नहीं जाऊंगी, नहीं हटूंगी’, परंतु संवैधानिक बाध्यताओं के चलते कुर्सी का त्याग करना अनिवार्य हो जाता है।

अब चुनाव में हार-जीत का दौर समाप्त हो चुका है

दुबे ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि हमें यह प्रतीत होता है कि राज्यपाल के पास यह शक्ति निहित है कि वे राज्य के लिए एक नए मुख्यमंत्री का चयन करें, और यह पूरी तरह से एक निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा है। अब चुनाव में हार-जीत का दौर समाप्त हो चुका है, और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल में विजय प्राप्त कर ली है। हमारा यह मानना है कि भाजपा को अब पश्चिम बंगाल राज्य के विकास और उन्नति के लिए समर्पित होकर कार्य करना चाहिए, ताकि राज्य के नागरिकों का हित सर्वोपरि रहे।

फिर से आ सकती है टीएमसी?

उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पश्चिम बंगाल से 29 सीटें जीती थीं, जो यह दर्शाता है कि टीएमसी का राज्य में अभी भी महत्वपूर्ण प्रभाव विद्यमान है। आनंद दुबे ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि टीएमसी चाहे तो वह फिर से अपनी शक्ति का संचय कर खड़ी हो सकती है, इसके लिए केवल दृढ़ इच्छाशक्ति और सही रणनीति की आवश्यकता है।

आनंद दुबे ने यह उम्मीद भी जताई कि ममता दीदी यदि संकल्प लें तो पांच वर्ष के पश्चात, जब 2031 में अगले विधानसभा चुनाव होंगे, वे पुनः मुख्यमंत्री पद पर आसीन हो सकती हैं, इसके लिए मात्र कड़ी मेहनत और समर्पण की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी सलाह दी कि छोटी-छोटी बातों से मन दुखी करके कार्य करना उचित नहीं होगा, बल्कि भविष्य की रणनीति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। दुबे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ममता दीदी को अब अपना इस्तीफा दे देना चाहिए और जो भी नए मुख्यमंत्री पदभार ग्रहण करेंगे, उनके साथ सहयोग स्थापित करके राज्य को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाने के बारे में विचार करना चाहिए, क्योंकि राज्य का विकास व्यक्तिगत निर्णयों से अधिक महत्वपूर्ण है।

Ankita Chourdia
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