मुंबई की विशेष अदालत ने महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (MSCB) घोटाले से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामले में एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार को राहत दी है। अदालत ने रोहित पवार को जमानत बॉन्ड भरने की शर्त पर रिहा किया और यह निर्देश दिया कि वे ट्रायल के दौरान अदालत में मौजूद रहेंगे। गौरतलब है कि ईडी ने पवार और उनकी कंपनी बरामती एग्रो के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, हालांकि जांच के दौरान उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई थी। रोहित पवार, एनसीपी (एसपी) के सुप्रीमो शरद पवार के पोते हैं।
रोहित पवार को बड़ी राहत
विशेष जज एस.आर. नवंदर ने सुनवाई के दौरान कहा कि मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) पहले ही इस मामले में C समरी रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है। अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब तक क्लोजर रिपोर्ट पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, ईडी का केस आगे नहीं बढ़ सकता। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 8 अक्टूबर की तारीख तय की है।
उधर, ईडी ने क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करते हुए हस्तक्षेप की इजाजत मांगी। विशेष लोक अभियोजक सुनील गोंसाल्वेस ने दलील दी कि या तो अदालत उन्हें दखल की अनुमति दे या फिर उनकी अर्जी को विरोध याचिका (Protest Petition) में बदला जाए, ताकि वे रिपोर्ट का विरोध कर सकें। हालांकि, अदालत ने यह मांग खारिज कर दी। जज ने कहा कि ईडी पहले ही इस विषय पर बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी है, इसलिए अब विशेष अदालत में उसकी मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए रोहित पवार ने कहा कि एफआईआर में अजित पवार, हसन मुश्रीफ समेत 75 नेताओं के नाम दर्ज हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने फैक्टरी खरीदी थी, उस समय राजनीतिक बोर्ड नहीं था बल्कि प्रशासक नियुक्त थे। पवार ने आरोप लगाया कि वे सरकार के खिलाफ बोल रहे हैं, इसलिए ईडी ने राजनीतिक दबाव में उनके खिलाफ कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि ईडी के अधिकारी गलत नहीं हैं, लेकिन मजबूरी में दबाव में काम कर रहे हैं। पवार ने विश्वास जताया कि उन्हें न्याय मिलेगा और अदालत में सच्चाई सामने आएगी।





