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मुंबई लोकल ब्लास्ट केस में बरी डॉ. वहिद शेख ने मांगा 9 करोड़ मुआवजा, जानें क्या कहा?

Written by:Neha Sharma
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मुंबई लोकल ट्रेन ब्लास्ट केस में बरी हुए एकमात्र आरोपी डॉ. वहिद शेख ने अब राज्य सरकार से 9 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा है। शेख का कहना है कि यह मुआवजा उनकी जिंदगी से छिन गए 9 साल, जेल में झेली गई यातनाओं और परिवार पर पड़े गहरे असर की भरपाई के लिए जरूरी है।
मुंबई लोकल ब्लास्ट केस में बरी डॉ. वहिद शेख ने मांगा 9 करोड़ मुआवजा, जानें क्या कहा?

मुंबई लोकल ट्रेन ब्लास्ट केस में बरी हुए एकमात्र आरोपी डॉ. वहिद शेख ने अब राज्य सरकार से 9 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा है। शेख का कहना है कि यह मुआवजा उनकी जिंदगी से छिन गए 9 साल, जेल में झेली गई यातनाओं और परिवार पर पड़े गहरे असर की भरपाई के लिए जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि वह किसी दान या खैरात के बजाय न्याय की मांग कर रहे हैं। शेख ने बताया कि 2006 में 28 साल की उम्र में उन्हें एटीएस ने झूठे आरोपों के तहत गिरफ्तार किया और उन पर मकोका लगाया गया। 2015 में सेशन कोर्ट ने सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया।

डॉ. वहिद शेख ने एबीपी न्यूज से बातचीत में कहा कि जेल में रहते हुए उन्होंने कस्टोडियल टॉर्चर सहा, जिससे उनकी सेहत बिगड़ गई। जेल में रहते हुए ही उनके पिता का निधन हो गया और उनकी मां मानसिक तनाव की वजह से बीमार हो गईं। परिवार पर करीब 30 लाख रुपये का कर्ज चढ़ गया। उनकी पत्नी और बच्चों को समाज में अपमान झेलना पड़ा। शेख ने कहा कि 9 साल की कैद के दौरान उनका करियर पूरी तरह खत्म हो गया और वे अपने परिवार के लिए भी कुछ नहीं कर पाए।

वहिद शेख ने मांगा 9 करोड़ मुआवजा

उन्होंने बताया कि इतने साल उन्होंने मुआवजा इसलिए नहीं मांगा क्योंकि उनके सह-आरोपी अभी जेल में थे। अब जबकि वे भी बरी हो गए हैं, यह साफ हो गया है कि पूरा केस फर्जी था। ऐसे में उनका मुआवजा मांगना और भी जायज हो गया है। शेख ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया जिसमें 2018 में इसरो वैज्ञानिक डॉ. नंबी नारायणन को गलत गिरफ्तारी और यातनाओं के लिए 50 लाख रुपये का मुआवजा मिला था। शेख का कहना है कि अगर एक वैज्ञानिक को न्याय मिल सकता है, तो उन्हें भी मिलना चाहिए।

डॉ. वहिद शेख ने कहा कि पैसे से उनकी जिंदगी के 9 साल लौटाए नहीं जा सकते, लेकिन यह मुआवजा अन्याय को स्वीकार करने और जिम्मेदारी तय करने का तरीका है। उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग और अल्पसंख्यक आयोग समेत कई संस्थाओं को शिकायत भेजी है। अब वे अपनी मांग जनता के सामने भी रख रहे हैं। शेख का कहना है कि मुआवजा न सिर्फ उनके लिए, बल्कि उन सभी लोगों के लिए जरूरी है जो गलत तरीके से फंसाए गए और वर्षों तक जेल में रहे।