गणेशोत्सव के दौरान मुंबई पुलिस को मिली धमकी के मामले में अब बड़ा खुलासा हुआ है। बिहार साइबर क्राइम पुलिस ने उस आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है जिसने दावा किया था कि मुंबई में 400 किलो आरडीएक्स छिपाकर लाखों लोगों की जान खतरे में डाल दी गई है। गिरफ्तार युवक की पहचान अश्विन सुप्रा के रूप में हुई है, जो आदतन साइबर अपराधी बताया जा रहा है। धमकी के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियों में अफरा-तफरी मच गई थी और सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई थी।
पुलिस जांच में सामने आया कि अश्विन ने गणेशोत्सव के दौरान यह झूठी सूचना फैलाई थी कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में 34 गाड़ियों में विस्फोटक रखे गए हैं। इस संदेश से लोगों में दहशत फैल गई थी। पुलिस ने तत्काल सुरक्षा बंदोबस्त बढ़ाते हुए जगह-जगह जांच अभियान चलाया। हालांकि जांच में कहीं भी विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। इसके बावजूद धमकी को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने इसे आतंकी हमले की साजिश की तरह लिया और जांच शुरू की।
बम धमकी मामले में साइबर ठग गिरफ्तार
बिहार पुलिस की जांच में यह भी पता चला कि अश्विन सुप्रा पहले से ही कई साइबर अपराधों में शामिल रहा है। पटना में उसके खिलाफ दो आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं। उसने अतीत में एक व्यापारी को फोन पर धमकी दी थी और नकली नाम से धोखाधड़ी की थी। मुंबई धमकी मामले में जब उसका नाम सामने आया तो बिहार पुलिस की एक विशेष टीम मुंबई पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के पास से सात सिम कार्ड बरामद किए गए हैं, जिन्हें वह धोखाधड़ी और धमकी के लिए इस्तेमाल करता था।
इस मामले में नोएडा पुलिस ने भी एक और आरोपी अश्विनी को हिरासत में लिया था और बाद में उसे मुंबई पुलिस के हवाले कर दिया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि दोनों आरोपी मिलकर लोगों को दहशत में डालने और साइबर अपराध से फायदा उठाने की कोशिश कर रहे थे। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि धमकी भरे संदेशों के पीछे कोई संगठित गिरोह है या यह केवल साइबर ठगी का मामला है।
गौरतलब है कि धमकी भरा संदेश मुंबई ट्रैफिक पुलिस के वॉट्सएप हेल्पलाइन नंबर पर भेजा गया था। इसमें दावा किया गया था कि 34 वाहनों में बम लगाए गए हैं और 400 किलो आरडीएक्स से पूरा मुंबई शहर हिल जाएगा। मैसेज में ‘लश्कर-ए-जिहादी’ नाम का इस्तेमाल करते हुए यह भी कहा गया था कि 14 पाकिस्तानी आतंकी भारत में घुस चुके हैं और धमाके से एक करोड़ लोगों की जान जा सकती है। हालांकि पुलिस जांच में यह दावा पूरी तरह झूठा निकला, लेकिन मामले ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया।
