
आदित्य ठाकरे
मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। शहर के कई इलाकों में जलभराव की वजह से नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच मंगलवार शाम को एक बड़ी घटना सामने आई, जब मैसूर कॉलोनी गेट के पास मुंबई मोनोरेल पटरी से उतर गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसा ट्रेन पर क्षमता से अधिक भार और अचानक बिजली सप्लाई बंद होने के कारण हुआ। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इसने एक बार फिर मुंबई के बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आदित्य ठाकरे ने सरकार को घेरा
हादसे के बाद शिवसेना (UBT) के विधायक आदित्य ठाकरे ने फडणवीस सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा, “मोनोरेल हादसा मुंबई में प्रशासनिक लापरवाही का एक और उदाहरण है। आज सुबह हवाई अड्डे पर पानी भर गया और उन क्षेत्रों में जलभराव हुआ जहाँ हाल ही में नए बुनियादी ढाँचे का निर्माण किया गया था। यह सोचने वाली बात है कि स्वयंभू ‘बुनियादी ढाँचे वाले नेता’ अब क्या कहेंगे।” ठाकरे के इस बयान ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ठाकरे ने आगे आरोप लगाया कि मौसम विभाग ने पहले ही रेड अलर्ट जारी कर दिया था, इसके बावजूद राज्य सरकार और स्थानीय निकायों ने कोई ठोस तैयारी नहीं की। उन्होंने कहा, “मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और वसई-विरार नगर निगम पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। थोड़ी-सी बारिश में ही शहर घुटनों पर आ गया।” ठाकरे के अनुसार यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का नतीजा है।
अपने बयान में ठाकरे ने सरकार को “वोट चोरी आयोग द्वारा समर्थित” बताते हुए निशाना साधा और कहा कि यह सरकार जनता की भलाई के लिए नहीं, बल्कि सत्ता के लिए बनी है। उनका कहना है कि हर बारिश में सरकार के दावों की पोल खुल जाती है। हवाई अड्डे से लेकर मोनोरेल तक, हर जगह अव्यवस्था और कुप्रबंधन साफ दिखाई देता है। फिलहाल मौसम विभाग ने आगे भी भारी वर्षा की चेतावनी दी है। ऐसे में यह हादसा तकनीकी खराबी से ज्यादा, तैयारी और जवाबदेही की कमी का नतीजा माना जा रहा है। विपक्ष के हमले और जनता की नाराज़गी ने एक बार फिर सरकार की जवाबदेही पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
