मुंबई में कबूतरखानों पर फिर विवाद, मंगलप्रभात लोढ़ा के उद्घाटन से भड़की सियासत

मुंबई में कबूतरखानों का विवाद एक बार फिर गहराता दिखाई दे रहा है। दादर कबूतरखाना बंद होने के बाद लगा था कि मामला शांत हो जाएगा, लेकिन गुरुवार को बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने बोरिवली में नए कबूतरखाने का उद्घाटन कर दिया।
मुंबई में कबूतरखानों पर फिर विवाद, मंगलप्रभात लोढ़ा के उद्घाटन से भड़की सियासत

मुंबई में कबूतरखानों का विवाद एक बार फिर गहराता दिखाई दे रहा है। दादर कबूतरखाना बंद होने के बाद लगा था कि मामला शांत हो जाएगा, लेकिन गुरुवार को बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने बोरिवली में नए कबूतरखाने का उद्घाटन कर दिया। लोढ़ा ने इसके फोटो और जानकारी सोशल मीडिया पर भी साझा की। इससे मराठी बनाम जैन विवाद के दोबारा भड़कने की आशंका जताई जा रही है।

लोढ़ा ने उद्घाटन के दौरान कहा कि मुंबई के हर वार्ड में एक आधिकारिक कबूतरखाना होना चाहिए। उनकी इस भूमिका का विरोध शुरू हो गया है। ‘हम गिरगांवकर’ संस्था ने बीएमसी को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि अगर शहर में कबूतरखाने बनाए जाएंगे तो उन्हीं जगहों पर चिकन और मटन सेंटर भी खोले जाएंगे। संस्था का कहना है कि मंत्री की यह पहल पूरी तरह से राजनीतिक है और इसका उद्देश्य मुंबई महापालिका चुनाव में खास वर्ग को साधना है।

मुंबई में कबूतरखानों पर फिर विवाद

गौरतलब है कि मुंबई में कबूतरखानों को लेकर पिछले कुछ महीनों से विवाद चल रहा है। मुंबई हाईकोर्ट ने भी कबूतरखानों पर लगी रोक को बरकरार रखा था। इसके बावजूद लोढ़ा द्वारा नया कबूतरखाना शुरू करना सवाल खड़े कर रहा है। संस्था ‘हम गिरगांवकर’ ने साफ शब्दों में कहा है कि वे कबूतरखानों की इस राजनीति को सफल नहीं होने देंगे। संस्था के अध्यक्ष गौरव सागवेकर ने तीखा हमला करते हुए कहा, ‘‘लोढ़ा ने कबूतरखानों का जो खेल शुरू किया है, उसे हम नाकाम कर देंगे।’’

मंगलप्रभात लोढ़ा ने जिस कबूतरखाने का उद्घाटन किया, वह बोरिवली नेशनल पार्क के पास त्रिमूर्ति जैन मंदिर परिसर में बनाया गया है। जैन समाज की ओर से इसका निर्माण किया गया और मंत्री ने उद्घाटन के मौके पर इसे सोशल मीडिया पर प्रचारित किया। इस कदम से नागरिकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब एक ओर कोर्ट ने कबूतरखानों पर रोक का आदेश दिया है, तो राज्य सरकार के मंत्री खुद उद्घाटन करके किस तरह संदेश देना चाहते हैं।

लोढ़ा ने अपने रुख पर डटे रहते हुए कहा कि मुंबई में कबूतरखाने जारी रहेंगे। उनके इस बयान के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने भी इसका विरोध किया और इसे चुनावी स्टंट करार दिया। वहीं ‘हम गिरगांवकर’ संस्था ने आक्रामक चेतावनी देकर साफ कर दिया है कि कबूतरखानों का मुद्दा अब और बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, एक कबूतरखाने का उद्घाटन मुंबई में नया राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर गया है।

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