
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार (18 सितंबर) को एक बार फिर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया। इस बयान पर शरद पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले ने खुलकर प्रतिक्रिया दी और जांच की मांग की। मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान सुले ने कहा कि यह दुख की बात है कि बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान और चुनाव आयोग को मिले अधिकारों की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर डेटा यह दिखा रहा है कि वोट चोरी हुई है, तो इसकी जांच जरूर होनी चाहिए क्योंकि ये आरोप झूठे नहीं हैं।
सुप्रिया सुले ने आगे कहा कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र से ही जांच शुरू करने की मांग करती हैं। उन्होंने कहा, “हम जीते हैं लेकिन हमारे क्षेत्र से ही जांच शुरू की जाए। इस देश में हमें कॉपी करके पास नहीं होना है, हमें मेहनत और मेरिट के आधार पर पास होना है। हम विपक्ष में हैं तो क्या हुआ, ऐसा नहीं है कि जब हारेंगे तभी जांच की मांग करेंगे। हम चाहते हैं कि पूरे देश में पारदर्शिता के साथ जांच हो।”
सुप्रिया सुले ने जांच की उठाई मांग
सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए सुले ने कहा कि विपक्ष के पास न तो आईटी, सीबीआई और ईडी (ICE) जैसे हथियार हैं और न ही कोई ‘वॉशिंग मशीन’। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सत्ताधारी दल इन एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए करता है, जबकि विपक्ष के पास ऐसा कोई साधन नहीं है। सुले ने कहा कि उनके पास सिद्धांत हैं और अगर कोई देश के खिलाफ गलत करता है तो वह माफी के लायक नहीं है। उन्होंने दोहराया कि सत्ता भले ही चली जाए, लेकिन देश से गद्दारी नहीं करेंगे।
दरअसल, सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष तब तक चुनाव आयोग पर सवाल नहीं उठाता जब तक वह चुनाव जीतता रहता है, लेकिन जैसे ही हार होती है, आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए जाते हैं। इस पर पलटवार करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते। अगर नंबर कुछ कह रहे हैं तो उनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जांच से ही सच सामने आएगा और इसी से लोकतंत्र पर भरोसा और मजबूत होगा।
वहीं, राहुल गांधी के आरोपों को चुनाव आयोग ने सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने कांग्रेस नेता द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया। निर्वाचन आयोग ने कहा कि किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले संबंधित व्यक्ति का पक्ष सुना जाता है और यह प्रक्रिया ऑनलाइन किसी भी व्यक्ति द्वारा प्रभावित नहीं की जा सकती। आयोग ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी की ओर से पेश की गई बातें गलत धारणा पर आधारित हैं और पूरी तरह तथ्यहीन हैं।
