राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर राज ठाकरे का बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल उन्होंने कहा है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े धन में अनियमितता के आरोप बेहद गंभीर हैं और इस पर खुलकर जवाब दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी भी धार्मिक संस्था में पारदर्शिता सबसे जरूरी है और सरकार को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।
दरअसल राज ठाकरे ने आरोप लगाया है कि जब विपक्ष सरकार से सवाल पूछता है, तो उसे राजनीति कह दिया जाता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से जवाब मांगना विपक्ष का अधिकार है और इसे राजनीति बताकर सवालों से बचा नहीं जा सकता। उन्होंने महाराष्ट्र के कई स्थानीय मुद्दों को भी उठाया और कहा कि जनता से जुड़े सवालों पर सरकार को साफ जवाब देना चाहिए।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर राज ठाकरे का बड़ा बयान
राज ठाकरे ने अपने संबोधन में कहा कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए धन को लेकर सामने आए आरोपों पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘अगर करोड़ों रुपये के चढ़ावे में गड़बड़ी की बात सामने आती है तो यह केवल वित्तीय मामला नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय भी है।’ इसके साथ ही ‘उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होनी चाहिए, लेकिन मामले को दबाने की कोशिश भी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया है कि अगर ऐसी ही घटना किसी गैर-बीजेपी सरकार के समय सामने आती, तो बीजेपी और उससे जुड़े संगठन देशभर में प्रदर्शन करते।
दरअसल राज ठाकरे ने कहा कि अब जब सत्ता उनके पास है तो विपक्ष के सवालों को राजनीति कहकर खारिज किया जा रहा है। उन्होंने पारदर्शी जांच, जवाबदेही और दोषियों पर कानून के मुताबिक कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों में दान और चढ़ावे के प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की जरूरत है ताकि श्रद्धालुओं का भरोसा बना रहे।
रेलवे भर्ती पर भी बोले राज ठाकरे
वहीं राम मंदिर के मुद्दे के अलावा राज ठाकरे ने महाराष्ट्र से जुड़े कई दूसरे विषयों पर भी अपनी बात रखी है। उन्होंने मिसिंग लिंक परियोजना पर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि विकास कार्यों पर सवाल उठाना राजनीति नहीं बल्कि जनता के हित में जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री के बयानों पर भी सवाल उठाए और कहा कि आलोचना को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए। रेलवे भर्ती के मुद्दे पर उन्होंने 2008 के मनसे आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस आंदोलन के बाद स्थानीय युवाओं को रेलवे में अवसर मिलने लगे। उन्होंने सवाल उठाया कि महाराष्ट्र में होने वाली रेलवे भर्तियों की जानकारी राज्य के अखबारों में पर्याप्त तरीके से क्यों नहीं दिखाई देती।






