खाद संकट और महंगाई पर गरजी कांग्रेस, प्रदेश सचिव और विधायक ने ली प्रेस कॉन्फ्रेंस

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मण्डला, सुधीर उपाध्याय| एम पी ब्रेकिंग न्यूज़ , ने बीते 2 दिनों से लगातार किसानों के खाद संकट का मुद्दा उठाया, फसल निकलने को है लेकिन व्यवस्था, घोर अव्यवस्था का शिकार बन चुकी है| सत्ता हो या विपक्ष या फिर प्रशासन किसानों की यह लघु लेकिन जरूरी समस्या का निदान नहीं कर पा रही है औऱ जिम्मेदार शांत है? लेकिन खबर के बाद आज कांग्रेस ने किसानों का यह मुद्दा लपक लिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये शासन प्रशासन पर आरोप लगाए हैं|

किसान और महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस विधायक नारायण पट्टा तथा प्रदेश सचिव संजय परिहार ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि भाजपा नेता किसानों की समस्याओं पर मुँह मोड़ रहे हैं| बीमारी के नाम पर अधिकारी, नेताओं के प्रश्रय पर गरीबों, किसानों की समस्याओं का निदान नहीं कर रहे| बीते 25 दिनों से किसान खाद के भटकने को मजबूर हैं| कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि बीमारी के सेंटर बदहाल हो रहे हैं जहां संक्रमण बढ़ने का खतरा मौजूद है कोई ध्यान देने वाला नहीं है| पेट्रोल डीजल के बढ़ते दामों के कारण आम जनता पिसी जा रही है न नेता और न ही ब्यूरोक्रेसी ध्यान दे रही है|

कांग्रेस ने व्यवस्था को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आम आदमी और किसानों के प्रति भाजपा और ब्यूरोक्रेट्स का यही रवैया रहेगा तो कांग्रेस इन मुद्दों के साथ जल्द ही सड़क पर उतरेगी, नेताओ ने कहा है कि कांग्रेस ने किसानों की समस्याओं पर पूर्व में भी ज्ञापन सौंपा था लेकिन सरकार का लचर सिस्टम व्यवस्था सुधारने में नाकाम हो रहा है और समूची भाजपा मजदूरों/ किसानों के मुद्दे पर शांत बैठी है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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