एक ऐसा तीर्थ स्थल जहां एक रात रुकने से मिलती है एक योनि से मुक्ति

एक ऐसा तीर्थ स्थल जहां एक रात रुकने से मिलती है एक योनि से मुक्ति

Mandsaur News : कल पूरे देशभर/ तीर्थ स्थल में बड़े ही धूमधाम से महाशिवरात्रि का त्यौहार मनाया गया। जगह- जगह जुलुस निकाल कर डीजे की धून पर लोग भक्ति में लीन नजर आए। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। मंदिरों को प्रबंधकों द्वारा खुब सजाया गया। भक्तों के विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश के धर्मराजेश्वर मंदिर में भी कल भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिला। इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा स्थापित की हुई है। जहां हर साल भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें लाखों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं।

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गरोठ क्षेत्र में स्थित

दरअसल, यह मंदिर मंदसौर जिले के गरोठ क्षेत्र में स्थित है। जहां हर साल पूरे देशभर से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। बता दें कि इस मंदिर की अलग ही इतिहास है। इस प्राचीन मंदिर का निर्माण चौथी- पांचवी शताब्दी में किया गया था। जिसे एक ही पत्थर को काटकर नकाशी की गई है जो कि देखने में भव्य है। साथ ही, इसका इतिहास महाभारत युग से जुड़ा हुआ है। जहां पर पांडवों ने अपना अज्ञातवास काटा था और यह मंदिर एलोरा की गुफाओं से काफी मिलता- जुलता है।

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जानें खासियत

इस मंदिर में विष्णु एवं बिना नंदी शिव की प्रतिमा स्थापित है। यहां कि ऐसी मान्यता है कि शिवरात्रि के अवसप पर यहां एक रात रुकने से एक योनि की मुक्ति मिलती है। वहीं, दिल्ली से आए पर्यटक का कहना है कि यहां आकर उन्हें काफी अच्छा लगता है।

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मंदसौर से राकेश धनोतिया की रिपोर्ट

Sanjucta Pandit
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सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit →
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