मंदसौर के गरोठ स्थित गांधी सागर बांध की मजबूती और रखरखाव का जायजा लेने लिए भोपाल से विशेषज्ञों की टीम पहुंची। बांध सुरक्षा एक्ट के तहत तकनीकी विशेषज्ञों की ये टीम यहां पहुंची थी। इस दौरान बांध से जुड़ी सबही व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया गया।
रविवार और सोमवार दो दिन तक टीम ने बांध के निर्माण के इतने सालों के बाद इसमें आए बदलावों और मौजूदा स्थिति की तकनीकी जांच की। अब टीम एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। जिसके आधार पर आवश्यक कार्य प्रस्तावित किए जाएंगे।
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यहां है 115 मेगावाट का विद्युत गृह
बता दें कि गांधी सागर बांध से बड़ी मात्रा में बिजली का उत्पादन भी होता है। यहां 115 मेगावाट का विद्युत गृह है। इसमें 23 मेगावाट की पांच इकाइयां बनाई गई है। यहां बनने वाली बिजली मध्य प्रदेश और राजस्थान दोनों ही राज्यों के काम आती है।
विशेषज्ञों ने की जरूरी जांच
निरीक्षण के लिए पहुंचे विशेषज्ञों की टीम ने बांध के गेट खोलने और बंद करने की प्रक्रिया की जांच की। इसी के साथ परिचालन क्षमता और कंक्रीट की दीवारों की मजबूती की जांच भी की गई। सारी चीजों को बारीकी से देखा गया ताकि खामियों को दूर कर भविष्य की संभावित आपदाओं से बचाव के उपाय किए जा सकें।
रिपोर्ट के बाद होगा आगे काम
गांधी सागर बांध के इस निरीक्षण का उद्देश्य बांध के स्वास्थ्य और रखरखाव की व्यवस्था को अच्छी तरह से जांचना है। अब निरीक्षण टीम द्वारा एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर अगर जरूरत पड़ती है बांध के रखरखाव और मजबूती के लिए काम किए जाएंगे।
1954 में रखी गई थी नींव
मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान तक के नागरिकों को पानी उपलब्ध कराने वाले इस बांध की नींव 1954 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी। निर्माण पूरा होने के बाद साल 1960 में इसे मध्य प्रदेश शासन को समर्पित किया गया था। इसकी जलभराव की क्षमता 7164 मिलियन घन मीटर है।