मंदसौर में रोजाना 6 किमी पैदल चल स्कूल जा रहे छात्र, बस में बैठने की नहीं है परमिशन

शिक्षा व्यवस्था पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही सरकार का उद्देश्य कई बार लापरवाही की भेंट चढ़ जाता है। ऐसा ही मामला मंदसौर के मल्हारगढ़ से सामने आया है। यहां स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को रोजाना 6 किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है।
Mandsaur

शासन द्वारा करोड़ों रुपए खर्च कर सांदीपनी सीएम राइज स्कूल बनाए गए हैं। इसमें जो छात्र पढ़ रहे हैं, उन्हें स्कूल लाने ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था भी की गई है। इसके बावजूद भी मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ इलाके के छात्र सुविधाओं के अभाव का सामना कर रहे हैं।

सरकार शिक्षा व्यवस्था पर भले ही करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। लेकिन निचले स्तर पर व्यवस्थाओं की खामियों का सबसे ज्यादा असर छात्रों पर पड़ रहा हुआ। मल्हारगढ़ स्थित अनुसूचित जाति सीनियर बालक छात्रावास में रहने वाले बच्चों को स्कूल जाने के लिए रोजाना 6 किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है।

पैदल स्कूल जाने को मजबूर छात्र

इस छात्रावास में लगभग 25 से 30 छात्र रहते हैं। जिन्हें रोजाना शिक्षा के लिए संघर्ष करते देखा जा सकता है। सुबह ये अपने कंधों पर स्कूल बैग लेकर विद्यालय तक पहुंचने के लिए 3 किलोमीटर पैदल चलते हैं। वहीं छुट्टी होने के बाद इन्हें वापस उतनी ही दूरी तय कर छात्रावास वापस आना पड़ता है।

सामने से गुजर जाती है बस

इस मामले की सबसे बड़ी विडंबना ये है कि विद्यालय की स्कूल बस इन छात्रों के सामने से गुजर जाती है, लेकिन नियमों का हवाला देकर इन्हें बस में बैठने की अनुमति नहीं दी जाती है। बच्चों का कहना है कि वो रोजाना आने जाने में परेशानी का सामना करते हैं।

बारिश में गीली हो रही किताबें

फिलहाल बरसात का मौसम चल रहा है। ऐसे में जब ये बच्चे छात्रावास से स्कूल जाने के लिए निकलते हैं तो कई बार बारिश के चलते गीले हो जाते हैं। तेज बारिश के बीच इनकी स्कूल ड्रेस, बैग और किताबें सब खराब हो जाता है। सड़कों पर भरा पानी भी कई बार आने जाने में मुश्किल खड़ी कर देता है। फोरलेन सड़क को पार करने के दौरान तेज रफ्तार वाहनों से दुर्घटना का डर भी बना रहता है।

प्राचार्य का क्या कहना

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में स्कूल प्राचार्य अशोक कुमार वाघेला का कहना है कि छात्रावास के विद्यार्थी आवासीय श्रेणी में आते हैं। नियमों के मुताबिक इन्हें स्कूल बस या साइकिल योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि छात्रावास काफी दूर है। मामला अब उनके संज्ञान में आया है। वो एसडीएम से बात कर समस्या का समाधान करने का प्रयास करेंगे।

Diksha Bhanupriy
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"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
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