जाति प्रमाणपत्र बनाने राजस्व निरीक्षक ने किसान से मांगी रिश्वत, लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथ पकड़ा

किसान संतोष सिंह ने जैसे ही SDM कार्यालय मुरैना में पदस्थ  राकेश जैन को रिश्वत की राशि 1000/- रुपये दी, इशारा मिलते ही बाहर खड़ी लोकायुक्त की टीम कार्यालय में घुसी और द्वितीय तल पर राजस्व निरीक्षक कक्ष मुरैना में उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।
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भ्रष्टाचारियों पर लगातार एक्शन के बाद भी प्रदेश में घूसखोरी बंद नहीं हो रही है, लोकायुक्त पुलिस ने इसी क्रम में एक रिश्वतखोर शासकीय सेवक को गिरफ्तार किया है, ट्रैप की कार्रवाई ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस टीम ने मुरैना में की है।

ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक निरंजन शर्मा से मिली जानकारी के मुताबिक  मुरैना जिले के गोपियापुरा में रहने वाले किसान संतोष सिंह कुशवाहा ने उनके कार्यालय में 18 फरवरी को एक शिकायती आवेदन दिया था आवेदन में राजस्व व्रत मृगपुरा मुरैना में पदस्थ राजस्व निरीक्षक राकेश जैन पर रिश्वत मांगने के आरोप लगाये थे।

जाति प्रमाणपत्र बनाने मांगी 20000 रुपये रिश्वत  

किसान संतोष सिंह ने बताया कि उन्होंने राजस्व व्रत मृगपुरा मुरैना में अपने तीन पुत्रों के जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था वहां पदस्थ राजस्व निरीक्षक राकेश जैन ने उनसे इसके बदले 20 हजार रुपये की मांग की और उनसे 500/- रुपये एडवांस में ले लिए।

शिकायत सत्यापन के दौरान 500 रुपये और ले लिए 

शिकायत मिलने के अगले दिन 19 फरवरी को लोकायुक्त पुलिस ग्वालियर की टीम ने सत्यापन किया जिसमें राजस्व निरीक्षक ने 500/- रुपये और आवेदक से ले लिए तथा शेष बचे 1000/- रुपये 24 फरवरी को लेने की बात कही, लोकायुक्त पुलिए ने इसके बाद ट्रैप प्लान की।

SDM कार्यालय में रिश्वत लेते दबोचा 

राजस्व निरीक्षक राकेश जैन द्वारा बताये समय पर आज फरियादी को उसके पास रिश्वत के साथ भेजा गया , किसान संतोष सिंह ने जैसे ही SDM कार्यालय मुरैना में पदस्थ  राकेश जैन को रिश्वत की राशि 1000/- रुपये दी, इशारा मिलते ही बाहर खड़ी लोकायुक्त की टीम कार्यालय में घुसी और द्वितीय तल पर राजस्व निरीक्षक कक्ष मुरैना में उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी के खिअल्फ़ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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