लॉकडाउन के बीच घर मे राशन न होने पर युवक ने किया आत्महत्या का प्रयास

लॉकडाउन के बीच घर मे राशन न होने पर युवक ने किया आत्महत्या का प्रयास

मुरैना| संजय दीक्षित| प्रदेश के मुखिया लॉक डाउन के दौरान जनता को संबोधित करते हुए कहते है कि कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। उसकी व्यवस्था की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की रहेगी। कलेक्टर प्रियंका दास से सभी वार्डों में सेक्टर अधिकारी नियुक्त किए है जिससे कोई भी गरीब व्यक्ति बिना राशन के भूखा न रहे । इसके लिए सेक्टर अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गयी हैं।लेकिन सेक्टर अधिकारी की लापरवाही से एक ऐसा मामला सामने आया हैं जिसमे युवक के द्वारा परिवार वालों के लिए समुचित राशन की व्यवस्था नही होने के कारण आत्महत्या करने का प्रयास किया।

सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के यादव कोलोनी में टिक्की का ठेला लगाने वाले देवेंद्र पुत्र पाना राठौर उम्र 28 वर्ष ने जहर खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया।जिसके बाद उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल मे भर्ती कराया गया है।देवेंद्र की पत्नी आरती का कहना है कि टिक्की का ठेला लगाकर परिवार का भरण पोषण करते हैं।टिक्की बेचकर जो भी बचता था उससे घर का खर्च चलता था।लेकिन लोक डाउन के बाद घर पर ही बैठे है औऱ भरण पोषण करना मुश्किल हो गया था।कुछ दिन पहले गौ सेवक घर पर राशन दे गए थे,जिसके बाद राशन पूरी तरह खत्म हो गया था फिर आसपास के लोगों से लेकर तीन चार दिन काम चला लिया।बच्चे रो रो कर रोज मांगते हैं कि खाना चाहिए लेकिन खाने की घर मे कोई भी व्यवस्था न होने से देवेंद्र ने आत्महत्या करने का प्रयास किया।उसको जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसका उपचार चल रहा है।फिलहाल उसकी स्थिति नियंत्रण हैं।सूचना मिलने के बाद एक कदम मानवता की ओर टीम भी जिला अस्पताल पहुंच गयी और उनके परिवारवालों के लिए राशन की व्यवस्था का इंतजाम किया गया।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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