अब कुत्तों पर पहुंची राजनीति, सिंधिया के लिए क्या कह गए अरुण यादव

अब कुत्तों पर पहुंची राजनीति, सिंधिया के लिए क्या कह गए अरुण यादव

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| मध्यप्रदेश (Madhyapradesh) में उपचुनावों (Byelection) का शबाब जोरो पर है और ऐसे में आरोप-प्रत्यारोपो की झड़ी लगी है। कांग्रेस (Congress) छोड़ बीजेपी (BJP) में शामिल हुए राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) इन दिनों जमकर कमलनाथ (Kamalnath) और कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार पर हमले बोल रहे हैं।

अशोकनगर (Ashoknagar) की एक सभा में उन्होंने जनता से कहा कि कांग्रेस उन्हें कुत्ता कहती है। हां मैं कुत्ता हूं लेकिन मैं जनता का वफादार कुत्ता हूं और जनता की वफादारी के लिए सब कुछ करने को तैयार हूं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव (Arun Yadav) ने कहा है अमेरिका में पिटबुल टेरियर नाम के कुत्ते की एक नस्ल ऐसी होती है जो अपने मालिक पर ही हमला कर देती है ।

कांग्रेस नेता ने कहा अरुण यादव ने सिंधिया जी नाहक ही मुंगावली की सभा में अपने आप को बार-बार कुत्ता कह रहे हैं क्योंकि कुत्ते की यह नस्ल अपने ही मालिक को खा जाती है । अरुण यादव के इस कटाक्ष पर बीजेपी की ओर से क्या जवाब आता है यह देखने वाली बात होगी लेकिन इन उपचुनावों में भाषा की मर्यादा तार-तार हो गई हैं।

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इन चुनावों में महिलाओं के लिए आइटम और रखैल जैसे शब्दों का ही प्रयोग नहीं किया गया बल्कि मंत्री जी ने तो जिंदा गाड़ देने तक की धमकी दे डाली। कमलनाथ से स्टार प्रचारक का दर्जा उनकी आइटम शब्दावली के कारण छिन गया| वही मंत्री मोहन यादव को भी अपनी बयान के चलते 1 दिन के लिए प्रचार से प्रतिबंधित किया गया। हालांकि हर पार्टी का नेता दूसरी पार्टी के नेता को यह नसीहत देता है कि वह बिलो द बेल्ट वार ना करें और भाषा की मर्यादा का ध्यान रखें| लेकिन हर पार्टी में कोई ना कोई नेता ऐसा बयान दे ही देता है जो आए दिन बबालों का कारण बन जाता है|

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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