मंच से बोले सिंधिया-‘हां कमलनाथ मैं कुत्ता हूँ, मेरे मालिक को उंगली दिखाई तो कुत्ता काट लेगा’

मंच से बोले सिंधिया-‘हां कमलनाथ मैं कुत्ता हूँ, मेरे मालिक को उंगली दिखाई तो कुत्ता काट लेगा’

अशोकनगर, हितेंद्र बुधोलिया| मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) की 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव (Byelection) के लिए अंतिम दौर में राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है| बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) के दिग्गज नेता मंच से एक दूसरे पर हमले बोल रहे हैं| जिसमे शब्दों की मर्यादा भी लगातार टूटती नजर आ रही है| इस बीच राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya scindia) ने खुद को ‘कुत्ता’ कह दिया| सिंधिया का यह बयान ठीक वैसे ही था जैसे कांग्रेस नेता द्वारा भूखे नंगे घर का बताने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था हाँ मैं भूखा नंगे घर का हूँ| इस बयान को बीजेपी ने मुद्दा बना लिया जिसके चलते कांग्रेस की किरकिरी हुई| अब सिंधिया ने भी कुछ इसी तरह का बयान देकर जनता के बीच नया दांव चला है|

दरअसल, अशोकनगर के शाडोरा में सिंधिया आज भाजपा प्रत्याशी जजपाल जज्जी के समर्थन में आयोजित सभा को सम्बोधित कर रहे थे| इस दौरान उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर जमकर निशाना साधा| सिंधिया ने कहा कमलनाथ अशोकनगर आये थे और मुझे कुत्ता कहा| सिंधिया आगे बोले ‘हाँ मैं कुत्ता हूँ, क्यूंकि मेरी मालिक मेरी जनता है, जिसकी सेवा में करता हूँ, हाँ कमलनाथजी मैं कुत्ता हूँ, क्यूंकि कुत्ता अपने मालिक और अपने दाता की रक्षा करता है’|

सिंधिया ने आगे कहा ‘हाँ कमलनाथजी मैं कुत्ता हूँ क्यूंकि कोई भी व्यक्ति मेरी मालिक को ऊँगली दिखाए और मालिक को भ्रष्टाचार और विनाशकारी नीति दिखाए तो कुत्ता काटेगा उसे’| सिंधिया ने कहा 15 महीनों तक कमलनाथ जी को जनता की याद नहीं आई, वल्लभ भवन में बैठकर वह अपनी जेब भरते रहे। आज जब उनकी सरकार सड़क पर आ गई है तो जनता के पास जा रहे हैं वोट मांगने।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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