कमलनाथ के रिएक्शन पर वीडी शर्मा का पलटवार, चुनाव आयोग ने आपके दंभ और अहंकार को आइना दिखाया

कमलनाथ के रिएक्शन पर वीडी शर्मा का पलटवार, चुनाव आयोग ने आपके दंभ और अहंकार को आइना दिखाया

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| चुनाव आयोग (Election Commission) की कार्रवाई के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamalnaath) ने ट्वीट कर कहा है कि मेरी आवाज़ को रोकने का, दबाने का प्रयास है। कांग्रेस की आवाज़ को कुचलने का प्रयास है। सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं। जनता सच्चाई का साथ देगी। कमलनाथ के रिएक्शन पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा (VD Sharma) ने पलटवार करते हुए कहा है कि कमलनाथ को चुनाव आयोग ने उनके दम्भ और अहंकार को आइना दिखाया है|

वीडी शर्मा ने कमलनाथ के ट्वीट पर पलटवार करते हुए लिखा- कमलनाथ जी, चुनाव आयोग ने आपके दंभ और अहंकार को आइना दिखाया है। जिस तरह आप अमर्यादित भाषा एवं अपशब्दों का उपयोग चुनाव प्रचार में कर रहे थे, उसकी सभ्य समाज में कोई जगह नहीं है। लेकिन शायद आपको यह समझ नहीं आएगा, क्यूंकि कांग्रेस की संस्कृति से आपने यही सीखा है।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने आगे लिखा -कांग्रेस की मानसिकता हमेशा तानाशाही वाली रही है, किसी भी संबैधानिक संस्था को सम्मान देना कांग्रेस की आदत में नहीं है, चाहे फिर वो उच्चतम न्यायालय हो या चुनाव आयोग कोई भी ऐसा फैंसला जो कांग्रेस के खिलाफ हो, कांग्रेस को उसमें साजिस दिखती है।

शर्मा ने कहा कमलनाथ जी ने एक दलित बहन के लिए अपशब्दों का उपयोग किया जिसके लिए चुनाव आयोग ने उनको दोषी पाया, लेकिन अभी भी अपनी गलती मानने की वजाय चुनाव आयोग पर हमला कर रहे हैं। दलित समाज कांग्रेस को इस तानाशाही मानसकिता का जवाब जरूर देगा।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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