जब सामने आये विरोधी तो लगा लिया गले, इमरती देवी का कांग्रेस प्रत्याशी के घर आत्मीय स्वागत

जब सामने आये विरोधी तो लगा लिया गले, इमरती देवी का कांग्रेस प्रत्याशी के घर आत्मीय स्वागत

डबरा/सलिल श्रीवास्तव| राजनीति में सब जायज है, एक दूसरे पर आरोप और प्रत्यारोप का दौर विपक्षी दल के नेताओं द्वारा लगातार जारी रहता है पर कई बार ऐसे मौके भी आते हैं की आपस में रिश्तेदार चुनावी मौसम में आमने-सामने हो जाते हैं | ऐसा ही कुछ इस बार डबरा विधानसभा में देखने को मिल रहा है जहाँ भाजपा प्रत्याशी इमरती देवी सुमन और कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश राजे जो रिश्ते में एक दूसरे के समधी समधन लगते हैं आमने सामने आ गये हैं |

दोनों के बीच बयानों के बाण जमकर इस उपचुनाव के दौरान चले हैं और लोगों ने उन्हें देखा और सुना भी है पर आज जो कुछ हुआ वह बताता है राजनीति अपनी जगह रिश्तेदारी अलग। हुआ यूं कि आज भाजपा प्रत्याशी इमरती देवी सुमन नगर के वार्ड क्रमांक 16 में जनसंपर्क कर रही थी और इसी वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश राजे का घर है, जब इमरती देवी जनसंपर्क करते हुए सुरेश राजे के घर के बाहर पहुंची तो उस घर की महिलाओं ने उनका आत्मीय स्वागत किया| शॉल श्रीफल देकर टीका किया साथ ही दोनों ने एक दूसरे को गले लगकर अग्रिम शुभकामनाएं दी और एक दूसरे से कहां की कोई गलती हुई हो तो माफ करें |

इमरती देवी ने भी कहा कि राजनीति में सब चलता है हम तो मौड़ी वाले हैं सदा झुकेंगे आज का जनसंपर्क लोगों में चर्चा का विषय बन गया और सीख भी सिखा गया की राजनीति में सब चलता है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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