
MP News: मध्य प्रदेश की सियासत में अब भाषा के स्तर पर विवाद हो गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chauhan) के एक भाषण के अंश को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने ट्वीट करके कहा है कि ऐसी ओछी भाषा से कुछ हासिल नहीं होता।
क्या कहा शिवराज ने?
मध्य प्रदेश में चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और कांग्रेस और बीजेपी पूरे दमखम के साथ जनता के सामने उतर गए हैं।जहां एक और बीजेपी और कांग्रेस में बैठकों का दौर जारी है वहीं दोनों के नेता अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर ताबड़तोड़ दौरे कर रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इन दिनों प्रदेश के दौरे पर हैं और लोगों को विकास की नई सौगात दे रहे हैं। ऐसे ही एक कार्यक्रम में नीमच जिले के मनासा में बोलते हुए शिवराज ने प्रदेश की बदहाल सड़कों को लेकर कांग्रेस पर तंज कसा और कहा कि “कमलनाथ मुझसे मेरे 18 महीने का हिसाब मांगते हैं। ऐ कमलनाथ, जब तेरी सरकार थी तब सड़कों में गड्ढे थे या गड्ढों में सड़क थी या गड्मगड्डा था,यह सब जानते हैं। सड़कों का अता-पता नहीं था। मुझसे बात कर रहा है।”
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कमलानाथ का शिवराज को जवाब
शिवराज के इस बयान को लेकर कांग्रेस मुखर है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट किया है और उस ट्वीट में लिखा है”शिवराज जी आपने मेरे लिए कहा, ‘तेरी पार्टी की सरकार थी’। और भी शब्द बोले जिनका लहजा बेहद अशोभनीय था। आप क्यों इस तरह बौखला रहे हैं? आपने कुछ दिन पहले मुझे गालियां भी दी थीं। गालियां देकर कोई जनता का दिल नहीं जीत सकता। माना कि आप हार रहे हैं और बुरी तरह हार रहे हैं, लेकिन ओछी भाषा का इस्तेमाल करने से क्या हासिल होगा? हां, मैं आपको जरूर आश्वस्त करता हूं कि आपकी गालियों के बदले में मेरी ओर से आपको अपशब्द नहीं मिलेंगे। जनता हमारी न्यायाधीश है, वह खुद अच्छे और बुरे की परख कर लेगी और न्याय करेगी।”
शिवराज जी आपने मेरे लिए कहा: ‘तेरी पार्टी की सरकार थी’। और भी शब्द बोले जिनका लहजा बेहद अशोभनीय था। आप क्यों इस तरह बौखला रहे हैं? आपने कुछ दिन पहले मुझे गालियां भी दी थीं। गालियां देकर कोई जनता का दिल नहीं जीत सकता। माना कि आप हार रहे हैं और बुरी तरह हार रहे हैं, लेकिन ओछी भाषा…
— Kamal Nath (@OfficeOfKNath) August 7, 2023
हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब राजनेताओं की भाषा का स्तर चर्चा का विषय ना बना हो और अब चूंकि लड़ाई कांटे की है, ऐसे में अब आए दिन इस तरह की भाषा का प्रयोग मध्यप्रदेश की राजनीति में देखने को मिलेगा, इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

