आंध्र प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला, राज्य में वक्फ बोर्ड भंग, नया बोर्ड होगा गठित, आदेश जारी

आंध्र प्रदेश में वक्फ बोर्ड को भंग कर दिया गया है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने आदेश जारी किया है।
Waqf Board Dissolved in Andhra Pradesh

Waqf Board Dissolved in Andhra Pradesh: वक्फ बोर्ड को लेकर एन चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। आंध्र प्रदेश में जगन मोहन सरकार द्वारा गठित वक्फ बोर्ड को भंग कर दिया गया है। नया बोर्ड स्थापित करने की बात कही गई है। इस संबंध में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने शनिवार को आदेश भी जारी किया है।

देशभर में वक्फ बोर्ड और इससे जुड़ी भूमि को लेकर विवाद चल रहा है। बिल में संशोधन और सुधार पर चर्चा भी हो रही है। इसी बीच राज्य सरकार ने पिछले आदेशों को वापस लिया है। जीओ-47 को रद्द करते हुए जीओ-75 जारी किया गया है।

आखिर सरकार ने क्यों उठाया यह कदम? (CM Chandrababu Naidu)

आदेश के मुताबिक वाईएसआरसी सरकार द्वारा गठित राज्य वक्फ बोर्ड 2023 से ही काम नहीं कर रहा है। बोर्ड में कुल 11 सदस्य थे। इसमें से तीन निर्वाचित और बाकी 8 मनोनीत थे। किसी भी पूर्व सांसद सदस्यों को शामिल नहीं किया गया था। बार काउंसिल श्रेणी से जूनियर अधिवक्ताओं को भी उचित मानदंडों के आधार पर नहीं चुना गया। एसके खाजा के बोर्ड सदस्य बनने पर भी कई शिकायतें सामने आई। बोर्ड के गठन प्रक्रिया को लेकर रिट याचिका दायर की गई है। हाई कोर्ट ने नवंबर 2023 को राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के चुनाव पर रोक लगा दी थी।

पिछले आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का आदेश जारी (Waqf Board News) 

मुख्य कार्यकारी, राज्य वक्फ बोर्ड, विजयवाड़ा ने सरकार के ध्यान में बोर्ड के निष्क्रियता, मुकदमों को हल करने और प्रशासनिक शून्यता को रोकने के लिए जिओ 47 पर कई सवाल उठायें। याचिकाओं के लंबित रहने की बात भी कही गई। सभी पहलुओं को देखते हुए सरकार ने पिछले आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लिया है। ताकि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की सुरक्षा हो सके और कामकाज में कोई बाधा न हो।

Manisha Kumari Pandey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey →
Follow Us :GoogleNews