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भोजशाला पर हाई कोर्ट के फैसले पर असदुद्दीन ओवैसी का बड़ा बयान, कहा – ‘सर्वोच्च न्यायालय इस फैसले को सही करेगा’

Written by:Banshika Sharma
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धार की भोजशाला को देवी सरस्वती का मूल मंदिर घोषित किया है। वहीं इस पर असदुद्दीन ओवैसी ने फैसले को बाबरी मस्जिद से जोड़ते हुए सुप्रीम कोर्ट से इसे पलटने की उम्मीद जताई है।
भोजशाला पर हाई कोर्ट के फैसले पर असदुद्दीन ओवैसी का बड़ा बयान, कहा – ‘सर्वोच्च न्यायालय इस फैसले को सही करेगा’

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के इंदौर खंडपीठ ने धार स्थित भोजशाला-मौला कमाल मस्जिद विवाद मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने शुक्रवार, 15 मई, 2026 को दिए अपने आदेश में कहा है कि विवादित स्थल मूल रूप से देवी सरस्वती का मंदिर है। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक सबूत भी इसी बात का समर्थन करते हैं। इस महत्वपूर्ण निर्णय के साथ ही, अदालत ने यह भी सुझाव दिया है कि मुसलमानों को मस्जिद के लिए किसी दूसरी जगह पर वैकल्पिक जमीन मुहैया कराई जा सकती है। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।

जानिए असदुद्दीन ओवैसी ने क्या कहा 

दरअसल असदुद्दीन ओवैसी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के इस फैसले पर टिप्पणी करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने अपने पोस्ट में इस फैसले को बाबरी मस्जिद पर दिए गए अदालत के निर्णय से जोड़ते हुए कहा कि, ‘हमें उम्मीद है कि देश का सर्वोच्च न्यायालय इस फैसले को सही करेगा और इस आदेश को पलट देगा।’ इतना ही नहीं, ओवैसी ने आगे कहा कि, ‘इस फैसले में बाबरी मस्जिद पर दिए गए फैसले जैसी स्पष्ट समानताएं दिखाई देती हैं।’ ओवैसी ने इस निर्णय पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है और इसे न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया है।

जानिए कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया 

यहाँ बता दें कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। इस बेंच ने उस पुराने आदेश को खारिज कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम पक्ष को भोजशाला में नमाज अदा करने की अनुमति थी। यह फैसला इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।

उल्लेखनीय है कि साल 2003 में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) द्वारा एक व्यवस्था बनाई गई थी। इस व्यवस्था के मुताबिक, हिंदू धर्मावलंबी मंगलवार के दिन और मुस्लिम समुदाय के लोग शुक्रवार को वहां पूजा-अर्चना और नमाज अदा करते रहे हैं। इस व्यवस्था के बाद, हिंदू पक्ष ने अदालत में एक याचिका दायर की थी। इस याचिका में हिंदू पक्ष ने परिसर में विशेष पूजा करने के अधिकार की मांग की थी। हाई कोर्ट का यह नवीनतम फैसला इसी याचिका के संदर्भ में आया है।

अयोध्या मामले के फैसले के सिद्धांतों को आधार माना

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि उसका यह निर्णय पुरातात्विक और ऐतिहासिक सबूतों, ASI की रिपोर्ट और अयोध्या मामले के फैसले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय सिद्धांतों के आधार पर दिया गया है। अदालत ने अपने फैसले में आगे कहा कि, ‘हमने पुरातात्विक और ऐतिहासिक सबूतों के साथ ASI की अधिसूचनाओं और सर्वे रिपोर्ट पर विचार किया है।’ कोर्ट ने यह भी बताया कि, ‘ASI कानून के प्रावधानों और अयोध्या मामले में स्थापित कानूनी सिद्धांतों के आधार पर यह अदालत ASI के रिसर्च के नतीजों पर भरोसा कर सकती है।’ इस प्रकार, कोर्ट ने अपने निर्णय की वैधता और आधार को मजबूत किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि फैसला गहन विचार-विमर्श और उपलब्ध साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद लिया गया है।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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