केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा झटका, जुलाई 2021 तक DA पर रोक

केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा झटका, जुलाई 2021 तक DA पर रोक

नई दिल्ली| देश में कोरोना (corona) संकट का असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है| जिसके चलते गुरुवार को भारत सरकार ने बड़ा फैसला किया है| कोरोनावायरस की वजह से उपजे हालात में केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है| सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले डीए (DA) यानी महंगाई भत्ते की बढ़ोतरी पर रोक लगा दी है| ये रोक एक जुलाई 2021 तक जारी रहेगी| डीए देने का फैसला कब किया जाएगा, ये 1 जुलाई 2021 को साफ होगा|

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आदेश के अनुसार, सरकार ने बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता (DA) रोकने का आदेश दिया है|कोरोना वायरस के संकट की वजह से 1 जनवरी, 2020 के बाद से केंद्रीय कर्मचारी या पेंशनधारी को मिलने वाली डीए की राशि नहीं दी जाएगी| वहीं, 1 जुलाई 2020 से जो एडिशनल डीए मिलना था उसको भी नहीं दिया जाएगा| सरकार के इस फैसले का असर 54 लाख सरकारी कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ेगा

आमतौर पर केंद्र सरकार के डीए को ही राज्य सरकारें भी लागू करती हैं। इसलिए माना जा रहा है कि जब केंद्र सरकार ने इन भत्तों पर रोक लगाईं है तो राज्य सरकार भी अपने कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए ऐसा ही कर सकती है। केंद्रीय कर्मचारियों को साल में दो बार DA दिया जाता है। पहला डीए हर साल 1 जनवरी को दिया जाता है जबकि दूसरा डीए हर साल 1 जुलाई को दिया जाता है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews