
Supreme Court, Ram Mandir, Ram Mandir Donation Case, Ram Mandir Donation Irregularities, Ram Temple Donation, CJI Surya Kant, SIT Investigation, SIT Probe, Ram Mandir Trust, Donation Case, Supreme Court Hearing, Forensic Auditor, Tushar Mehta, Uttar Pradesh SIT, Ayodhya Ram Mandir, Ram Mandir News, Supreme Court News, India News
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 2027 में होने वाली देश की पहली डिजिटल जनगणना में जाति दर्ज करने की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए केंद्र सरकार और भारत के रजिस्ट्रार जनरल को याचिका में दिए गए सुझावों पर विचार करने को कहा है।
यह जनगणना देश की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना होगी और 1931 के बाद पहली बार होगी, जब अनुसूचित जाति और जनजाति के अलावा अन्य जातियों की भी व्यापक गणना की जाएगी।
अदालत ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1958 और इसके तहत बने नियमों के अनुसार ही होती है। पीठ ने कहा कि यह कानून संबंधित अधिकारियों को यह तय करने का अधिकार देता है कि जनगणना किस तरीके से और किन बिंदुओं पर की जाएगी।
अदालत ने इस बात पर भरोसा जताया कि संबंधित प्राधिकरण विषय विशेषज्ञों की मदद से एक मजबूत और त्रुटिहीन व्यवस्था विकसित करेंगे। पीठ ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दे प्रासंगिक हैं, जिन्हें पहले ही रजिस्ट्रार जनरल के सामने रखा जा चुका है।
याचिका में क्या मांग की गई थी?
यह जनहित याचिका शिक्षाविद आकाश गोयल की ओर से दायर की गई थी, जिसकी पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने की। याचिका में मांग की गई थी कि जाति संबंधी जानकारी दर्ज करने, उसे वर्गीकृत करने और सत्यापित करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रश्नावली को सार्वजनिक किया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
याचिकाकर्ता का आरोप था कि जनगणना संचालन निदेशालय ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि नागरिकों की जाति की पहचान दर्ज करने के लिए कौन-से मानदंड अपनाए जाएंगे। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार जाति गणना का दायरा अनुसूचित जाति (SC) और जनजाति (ST) से आगे बढ़ाया जा रहा है।
क्यों खास है 2027 की जनगणना?
2027 में होने वाली जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होगी। यह भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी, जिससे आंकड़ों के संग्रह और विश्लेषण में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है। इसके अलावा, 1931 के बाद यह पहली बार होगा जब देश में इतने बड़े पैमाने पर जाति आधारित आंकड़े जुटाए जाएंगे। इन टिप्पणियों के साथ, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.
