केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम में कथित अनियमितताओं और साइबर सुरक्षा खामियों को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस छिड़ गई है। इस विवाद को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है और सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को निशाने पर लिया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि शिक्षा मंत्रालय की घोर लापरवाही और अनियमितताओं के कारण देश के लाखों विद्यार्थियों को भारी मानसिक परेशानी और तनाव से गुजरना पड़ा है। कांग्रेस ने इस गंभीर स्थिति के लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जिम्मेदार ठहराते हुए उनसे राजधर्म का पालन करते हुए तत्काल अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक साइबर सुरक्षा खामियों को नकारने के बाद, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने आखिरकार स्वीकार किया है कि उसका ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम वास्तव में प्रभावित हुआ था। जयराम रमेश ने इस स्वीकारोक्ति को महत्वपूर्ण बताया और सवाल उठाया कि इस पूरे प्रकरण में ठेका प्राप्त करने वाली कंपनी सीओईएमपीटी (COEMPT) के खिलाफ सरकार और सीबीएसई द्वारा क्या ठोस कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि छात्रों के भविष्य से जुड़े ऐसे संवेदनशील मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही अक्षम्य है।
सीबीएसई की निविदा प्रक्रिया पर कांग्रेस के गंभीर सवाल
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सीबीएसई की निविदा प्रक्रिया पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सीबीएसई ने अगस्त 2025 की निविदा शर्तों में यह प्रावधान रखा था कि अयोग्य कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया जा सकेगा। हालांकि, बाद में इस महत्वपूर्ण प्रावधान को संशोधन कर हटा दिया गया। जयराम रमेश ने इसे कंपनी को बचाने की एक स्पष्ट कोशिश करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संशोधन के पीछे मंशा किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाना था, भले ही इसके कारण छात्रों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़े। कांग्रेस ने इन अनियमितताओं की गहन जांच की मांग की है।
कांग्रेस ने की धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वह अपने पद पर रहते हुए अहंकार और अयोग्यता की मिसाल बन गए हैं। पार्टी ने प्रधान पर आरोप लगाया कि उन्होंने शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ठीक से नहीं किया है, जिसके परिणामस्वरूप छात्रों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। कांग्रेस ने मांग की है कि धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि वे छात्रों के हितों की रक्षा करने में विफल रहे हैं। यह एक राजनीतिक मांग है जो इस विवाद को और गहरा कर रही है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी भी सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया और उससे जुड़े शुल्क को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने उस समय कहा था कि जब शिक्षा को एक सेवा के बजाय कारोबार की तरह देखा जाता है, तो गलतियां सुधरने के बजाय लगातार बढ़ती जाती हैं। राहुल गांधी का यह बयान उस संदर्भ में आया था जब सीबीएसई के कक्षा 12 के कई छात्रों ने शिकायत की थी कि पुनर्मूल्यांकन के लिए पोर्टल पर जो उत्तर पुस्तिकाएं अपलोड की गई थीं, वे उनकी नहीं थीं। यह एक गंभीर त्रुटि थी जिसने छात्रों में भारी असंतोष पैदा किया था।
छात्रों की इन शिकायतों के सामने आने के बाद, सीबीएसई ने मामले की गंभीरता को समझते हुए संबंधित छात्रों से संपर्क किया और उन्हें उनकी सही उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराईं। हालांकि, इस घटना ने सीबीएसई की मूल्यांकन और तकनीकी प्रणालियों पर सवाल खड़े कर दिए थे। मौजूदा ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से जुड़े विवाद ने इन चिंताओं को एक बार फिर से उजागर किया है, और विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे एक बड़ा मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने का प्रयास किया है। यह पूरा मामला शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर देता है।
On Screen Marking (OSM) सिस्टम में साइबर सुरक्षा संबंधी खामियों से इनकार करने के बाद अब CBSE ने आखिरकार यह स्वीकार कर लिया है कि सिस्टम से समझौता किया गया था।
लेकिन अपने कॉन्ट्रैक्टर COEMPT के खिलाफ वह क्या कार्रवाई करने जा रहा है?
कुछ खास नहीं।
ऐसा प्रतीत होता है कि CBSE और… pic.twitter.com/8cd7GMQ6rT
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) June 1, 2026






