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पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं पर हमले को लेकर बोले प्रमोद तिवारी, कहा- राज्य में अब लोकतंत्र का नहीं, तानाशाही का बोलबाला है

Written by:Gaurav Sharma
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कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर हमलों की कड़ी निंदा की, कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए और इसे तानाशाही बताया।
पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं पर हमले को लेकर बोले प्रमोद तिवारी, कहा- राज्य में अब लोकतंत्र का नहीं, तानाशाही का बोलबाला है

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं और सांसदों पर हो रहे निरंतर हमलों को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने अत्यंत कड़ा रुख अख्तियार किया है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मीडियाकर्मियों से संवाद करते हुए उन्होंने इन घटनाओं की तीखी निंदा की और राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लगाए। प्रमोद तिवारी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि पश्चिम बंगाल में अब लोकतंत्र का नहीं, बल्कि अधिनायकवाद और तानाशाही का बोलबाला है। उनके इस बयान ने राज्य में राजनीतिक हिंसा के बढ़ते स्तर पर एक नई बहस छेड़ दी है।

सांसद प्रमोद तिवारी ने हाल ही में घटित टीएमसी नेताओं पर हुए हमलों का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने प्रश्न किया कि जब देश के चुने हुए जनप्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा और संरक्षा की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। यह स्थिति राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और कानून के शासन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक सांसद, जो भारत की संसद का सदस्य होता है और जनता का प्रतिनिधित्व करता है, यदि स्वयं को असुरक्षित महसूस करेगा, तो बंगाल में एक सामान्य राजनीतिक कार्यकर्ता की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। उनकी यह टिप्पणी राज्य में व्याप्त राजनीतिक भय और असुरक्षा के माहौल को रेखांकित करती है।

कल्याण बनर्जी पर हमले का जिक्र कर प्रमोद तिवारी ने उठाए सुरक्षा पर सवाल

प्रमोद तिवारी ने अपनी बात को पुष्ट करने के लिए विशिष्ट घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “कल ही सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और बेहद अनुभवी सांसद कल्याण बनर्जी पर हमला हुआ।” इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे। इसके अतिरिक्त, प्रमोद तिवारी ने आज सुबह सामने आई एक और घटना का उल्लेख किया, जिसमें एक तीसरे सांसद के कार्यालय पर हमला होने की खबर मिली थी। यह हमला रात के समय हुआ था और इसकी जानकारी सुबह सार्वजनिक हुई। इन लगातार हो रही घटनाओं ने यह दर्शा दिया है कि राज्य में राजनीतिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

केंद्र से हस्तक्षेप की अपील, कानून-व्यवस्था बहाल करने की मांग

कांग्रेस सांसद ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार को इन घटनाओं को गंभीरता से लेना चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह न केवल राज्य के लोकतंत्र के लिए खतरा होगा, बल्कि आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर भी नकारात्मक प्रभाव डालेगा। प्रमोद तिवारी ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक विरोध और असहमति लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं, लेकिन हिंसा और हमले किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकते। उन्होंने केंद्र सरकार से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने और राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की। उनकी यह मांग राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की ओर ध्यान आकर्षित करती है और एक मजबूत प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर बल देती है।

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