संसद परिसर में कांग्रेस का प्रदर्शन, राहुल गांधी ने दिखाई जनरल नरवणे की किताब, प्रियंका गांधी का हमला

राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए किताब दिखाते हुए कहा कि वो लोग कहते हैं कि जनरल नरवणे की किताब मौजूद नहीं है, लेकिन यह रही किताब। भारत के हर युवा को यह किताब देखनी चाहिए।
Congress protests in Parliament premises

संसद ने आज बुधवार को भी गतिरोध जारी रहा, कांग्रेस ने सदन के अन्दर और सदन के बाहर जनरल नरवणे की किताब पर सरकार को घेरने की कोशिश की, राहुल गांधी आज एक किताब लेकर संसद पहुंचें, किताब को उन्होंने जनरल नरवणे की किताब बताया और मीडिया को दिखाया, राहुल आज सफ़ेद की जगह काली टीशर्ट में संसद पहुंचे थे, राहुल के रुख को देखते हुए विपक्षी सांसदों ने आज सदन के बाहर प्रदर्शन किया मोदी सरकार के विरोध में नारेबाजी की।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर चीन का मुद्दा उठाते हुए लोकसभा में जनरल नरवणे की किताब के अंश को पढ़ना चाहा जिसपर स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें टोका, स्पिअक्र के टोकते ही विपक्षी सांसदों ने शोर शराबा शुरू कर दिया, जिसके बाद स्पीकर ने शांत रहने की अपील की लेकिन जब विपक्षी सांसदों लगातार उनकी बात को अनसुना कर दिया तो स्पीकर ने सदन को स्थगित कर दिया।

राहुल गांधी ने दिखाई जनरल नरवणे की किताब 

राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए हाथ में ली हुई किताब दिखाते हुए कहा कि वो लोग कहते हैं कि जनरल नरवणे की किताब मौजूद नहीं है, लेकिन यह रही किताब। भारत के हर युवा को यह किताब देखनी चाहिए। यह नरवणे की किताब है। ये जनरल मनोज मुकुंद नरवणे जी की किताब है, लेकिन मुझे कहा गया है कि मैं इसे Quote नहीं कर सकता हूं।

उन्होंने कहा इस किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कही एक लाइन है- ”जो उचित समझो, वो करो” यानि जब चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फोन कर बताया- बॉर्डर पर चीन के टैंक आ गए हैं, हमें क्या करना है? लेकिन तब राजनाथ सिंह का कोई रिप्लाई नहीं आया। नरवणे ने उन्हें फिर फोन किया, जिस पर रक्षा मंत्री ने कहा- मैं ‘ऊपर’ से पूछता हूं। ‘ऊपर’ से ऑर्डर आया कि जब चीन की सेना हमारे बॉर्डर के अंदर आए तो बिना हमसे पूछे फायर न करें।

नरेंद्र मोदी ने मैसेज दिया- “जो उचित समझो, वो करो

हमारी सेना चीन के टैंकों पर हमला करना चाहती थी, क्योंकि वो भारत की सीमा में घुस आए थे। लेकिन इस मुश्किल समय में नरेंद्र मोदी ने मैसेज दिया- “जो उचित समझो, वो करो” मतलब प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की और सेना से कहा- ‘आपको जो करना है करो, मेरे बस की नहीं है’।

राहुल गांधी के कहा आर्मी चीफ नरवणे ने अपनी किताब में साफ लिखा है- मुझे बहुत अकेलापन महसूस हुआ, मुझे पूरे तंत्र ने छोड़ दिया था।” नेता प्रतिपक्ष ने कहा  मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्री में आज लोकसभा आने की हिम्मत है। क्योंकि अगर वे आए तो मैं खुद जाकर उन्हें यह किताब सौंप दूंगा।

सांसदों के निलंबन पर भड़की प्रियंका गांधी 

विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित किये जाने पर प्रियंका गांधी ने सरकार को आड़े हाथ लिए, उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा  हर सत्र में विपक्ष के सांसदों को सस्पेंड किया जा रहा है, इसमें कोई नई बात नहीं रह गई है। राहुल गांधी एक पब्लिक सोर्स से Quote कर रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ही संजय बारू जी को Quote किया है। सत्ता पक्ष के लोग खुद कभी मैग्जीन तो कभी किताब से संसद में Quote करते रहे हैं। संसद लोकतंत्र का मंदिर है, देश के हर नागरिक की इस पर आस्था है। इसलिए हमें इसके अंदर जरूरी मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए।

असलियत में मोदी सरकार डर गई है

प्रियंका गांधी ने कहा संसद में हमेशा ही चीन, पाकिस्तान और विदेश नीति से जुड़े जरूरी मामलों पर चर्चा होती रही है। यही हमारी परंपरा रही है। विपक्ष हो या सरकार- सभी ने खुलकर अपना पक्ष रखा है। लेकिन असलियत में मोदी सरकार डर गई है कि उनकी सच्चाई देश के सामने आ जाएगी, इसलिए वो किताब को पब्लिश भी नहीं होने दे रहे हैं।

प्रियंका ने कहा नरवणे की किताब में लिखा है कि संकट के समय जब चीन की सेना हमारे बॉर्डर पर थी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और टॉप लीडरशिप का क्या रिएक्शन रहा। वहीं, दूसरी तरफ Epstein फाइल सामने आ रही हैं, जिससे मोदी सरकार के तार जुड़ रहे हैं। आखिर सरकार ने एक Convicted sex trafficker को क्यों कॉन्टैक्ट किया था? अब तो ये सारे Authenticated Documents हैं। अब अगर सदन में इन चीजों पर चर्चा नहीं होगी तो किस पर होगी?

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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