
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने शनिवार को दावा किया कि धनखड़ का न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर स्वतंत्र रुख अपनाना उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई। सिंघवी ने कहा कि धनखड़ ने न्यूनतम स्वतंत्रता दिखाने की कोशिश की, जिसे सरकार बर्दाश्त नहीं कर सकी। सूत्रों के मुताबिक, धनखड़ और सरकार के बीच तनाव पहले से ही बढ़ रहा था। न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ विपक्ष समर्थित महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार करने का मुद्दा अंतिम कारण बना।
सूत्रों ने बताया कि धनखड़ ने एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता से मुलाकात की थी और वे राज्यसभा में विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षरों के साथ औपचारिक रूप से प्रस्ताव शुरू करने की तैयारी में थे। केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू ने उनसे सत्तारूढ़ दल के सांसदों के हस्ताक्षर शामिल कर प्रस्ताव को सर्वसम्मति का रूप देने की अपील की, लेकिन धनखड़ ने इस पर अड़े रहने का फैसला किया। इस कदम से बीजेपी नाराज हो गई, जिसके बाद धनखड़ ने अचानक इस्तीफा दे दिया। सिंघवी ने इसे संवैधानिक तोड़-मरोड़ करार देते हुए सरकार पर महाभियोग प्रक्रिया पर नियंत्रण पाने के लिए उपराष्ट्रपति को हटाने का आरोप लगाया।
न्यायिक मामलों में दोहरे मापदंड का आरोप
सिंघवी ने बीजेपी पर न्यायिक मामलों में दोहरे मापदंड अपनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने न्यायमूर्ति वर्मा और न्यायमूर्ति शेखर यादव के मामलों में सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी का प्रस्तावों का खेल कानून से ज्यादा दिखावे के लिए है। सिंघवी ने न्यायमूर्ति यादव के विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में दिए गए विवादास्पद बहुसंख्यक बयान की आलोचना की, जिसे नफरत भरे भाषण को बढ़ावा देने वाला माना गया। उन्होंने कहा कि बीजेपी न्यायिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की बात तो करती है, लेकिन अमल में उसका रवैया ढुलमुल रहता है।
महाभियोग प्रस्ताव लाए जाने की तैयारी
कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि दोनों सदनों में एक ही दिन महाभियोग प्रस्ताव लाया जाता है तो दोनों सदनों के अध्यक्षों द्वारा संयुक्त रूप से वैधानिक समिति गठित की जाती है। उन्होंने बीजेपी पर संसदीय प्रक्रिया में हेरफेर और असुरक्षा का आरोप लगाते हुए कहा, “लोकसभा में पहले हमारा प्रस्ताव, राज्यसभा में नहीं। बाहर जाओ, उपराष्ट्रपति धनखड़!” इस पूरे घटनाक्रम ने सरकार और विपक्ष के बीच तनाव को और गहरा कर दिया है, जिससे संसद के आगामी सत्र में और हंगामे की आशंका बढ़ गई है।
