नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के दो प्रमुख रिहायशी इलाकों की तस्वीर जल्द ही बदलने वाली है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अपने पुराने स्टाफ क्वार्टरों के व्यापक पुनर्विकास के लिए नवरत्न कंपनी एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड के साथ हाथ मिलाया है। इसके लिए दोनों संस्थाओं के बीच दो अलग-अलग समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
यह मेगा प्रोजेक्ट नई दिल्ली के ओल्ड राजिंदर नगर और सफदरजंग विकास क्षेत्र (SDA) में लागू किया जाएगा। इन परियोजनाओं पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) को छोड़कर अनुमानित 775 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस विकास कार्य को मास्टर प्लान फॉर दिल्ली-2021 (MPD-2021) और पुनर्विकास योजनाओं की नीति के तहत मंजूरी दी गई है और इसे पूरी तरह से आत्मनिर्भर मॉडल पर पूरा किया जाएगा।
775 करोड़ की लागत से होगा कायाकल्प
समझौते के तहत, दोनों परियोजनाओं में कुल मिलाकर लगभग 1.66 लाख वर्ग मीटर के निर्मित क्षेत्र (BUA) का विकास किया जाएगा। इसमें से ओल्ड राजिंदर नगर में करीब 1 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र का विकास होगा, जिस पर 438 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं, सफदरजंग विकास क्षेत्र में 66 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र के विकास पर 337 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
फिलहाल, ओल्ड राजिंदर नगर में 117 और सफदरजंग विकास क्षेत्र में 152 पुरानी आवासीय इकाइयां हैं, जिनका इस्तेमाल डीडीए कर्मचारी आवास के रूप में कर रहा है। इन इमारतों की पुरानी स्थिति और उम्र को देखते हुए, दोनों जगहों पर आधुनिक, सुनियोजित और बेहतर बुनियादी ढांचे वाले आवासीय परिसर बनाने की योजना है।
NBCC संभालेगी प्रोजेक्ट की पूरी जिम्मेदारी
इस बड़े पुनर्विकास प्रोजेक्ट में एनबीसीसी की भूमिका काफी अहम होगी। कंपनी दोनों स्थानों पर लगभग 4 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए व्यापक मास्टर प्लानिंग करेगी। इसके अलावा, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करना, लागत और राजस्व मॉडल बनाना, सभी वैधानिक मंजूरियां प्राप्त करना, इंजीनियरिंग डिजाइन, निर्माण कार्य और गुणवत्ता ऑडिट की जिम्मेदारी भी एनबीसीसी की होगी। अधिकारियों के अनुसार, सभी मंजूरियां मिलने और भार-मुक्त भूमि सौंपे जाने के बाद इस परियोजना को तीन साल के भीतर चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य है।
“समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर राष्ट्रीय राजधानी में सतत शहरी पुनर्विकास और मूल्यवान भूमि संपत्तियों के अनुकूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ओल्ड राजिंदर नगर और सफदरजंग विकास क्षेत्र की परियोजनाएं आधुनिक आवासीय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेंगी।”- के. पी. महादेवस्वामी, सीएमडी, एनबीसीसी
इस एमओयू पर डीडीए के आयुक्त (आवास) कुणाल कश्यप और सीजीएम (इंजीनियरिंग) अनिल कुमार ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान डीडीए के उपाध्यक्ष एन. सरवाना कुमार और एनबीसीसी के सीएमडी के. पी. महादेवस्वामी समेत दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह समझौता आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत दो प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग को दर्शाता है।






