प्राइवेट स्कूल नहीं वसूल सकेंगे मनमानी फीस, दिल्ली हाईकोर्ट में सरकार की दलील- अभिभावकों को राहत देना जरूरी

निजी स्कूलों की फीस को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में बड़ा फैसला लिया है। मनमानी फीस वसूली बंद हो सके इसके लिए सरकार द्वारा फीस नियमन समितियां बनाने की अधिसूचना जारी की गई थी। ये मामला अब भी कोर्ट में चल रहा है।
Delhi High Court

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को निजी स्कूलों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सनी के दौरान सरकार ने स्पष्ट कहा कि निजी स्कूल 1 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं नए शैक्षणिक सत्र के लिए बिना नियमों और स्वीकृति के फीस नहीं वसूल सकेंगे। जो भी स्कूल नियमों का देखा करेगा वह कानून का उल्लंघन होगा, जिसपर एक्शन लिया जा सकता है।

दरअसल कई मर्तबा प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूले जाने के मामले सामने आते हैं। इसी पर सरकार ने अदालत को बताया कि नई फीस विनियमन व्यवस्था के तहत और स्वीकृत फीस के अलावा कोई भी फीस लेना कानूनन प्रतिबंधित होगा। इस नियम के बाद अब प्राइवेट स्कूल अभिभावकों से मर्जी के मुताबिक फीस नहीं वसूल सकेंगें।

सरकार का क्या कहना

इस मामले में सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अपनी दलील पेश की। उन्होंने कहा कि स्कूल स्तर की फीस नियमन समितियों के गठन पर अगर रोक लगाई गई तो गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इन समितियां के गठन से स्कूलों को कोई नुकसान नहीं होगा बल्कि नए सत्र से पहले फीस तय करने की प्रक्रिया आसानी से पूरी हो जाएगी।

सरकार ने अदालत में बताया कि दिल्ली स्कूल शिक्षा कानून के तहत स्कूल केवल स्वीकृत फीस ले सकते हैं। अगर 1 अप्रैल 2026 से पहले फीस निर्धारित नहीं होती है और मनमानी चलाई जाती है तो कानून का उद्देश्य सफल हो जाएगा। ये नियम व्यवसायीकरण और मुनाफाखोर रोकने के लिए बनाए गए हैं।

इस मामले में दिल्ली शिक्षा निदेशालय का कहना है कि यदि 2026 27 के सत्र से कानून लागू नहीं किया गया तो अभिभावकों को राहत देने का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। यह आदेश इसलिए पारित किया गया है ताकि नए सत्र की शुरुआत से फीस नियंत्रित और पारदर्शी रहे।

स्कूलों का क्या कहना

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने निजी स्कूल संघ की याचिकाओं पर सुनवाई की। इसमें सरकारी अधिसूचना को चुनौती दी गई थी जिसमें स्कूलों में 10 दिनों के अंदर स्कूल स्तरीय फीस नियमन समिति का गठन करने का निर्देश दिया गया था।

सुनवाई के दौरान निजी स्कूलों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल दलील देते दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिसूचना कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है क्योंकि ये अधिनियम में तय की गई समय सीमा को बदलती है। उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक फीस तय करने की प्रक्रिया पिछले साल शैक्षणिक वर्ष के जुलाई से शुरू होनी थी। अब इतने कम समय में फैसला करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

कब है सुनवाई

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को रखी है। इसी के साथ स्कूलों को दी गई समिति गठन की समय सीमा भी बढ़ा दी गई है। अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग पर अगली तारीख पर आदेश पारित किया जा सकता है।

Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
Diksha Bhanupriy

10 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में.

"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
Follow Us :GoogleNews