जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) का परिसर एक बार फिर छात्रों के विरोध प्रदर्शन और पुलिस के साथ टकराव का गवाह बना। बृहस्पतिवार को विभिन्न मुद्दों को लेकर शिक्षा मंत्रालय तक ‘लॉन्ग मार्च’ निकालने की कोशिश कर रहे छात्रों और पुलिस के बीच जमकर झड़प हुई। इस दौरान पुलिस ने JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा और पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार समेत 14 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जहां पुलिस का कहना है कि छात्रों ने बैरिकेड तोड़कर उन पर लाठियों और जूतों से हमला किया, वहीं छात्रों ने पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग करने और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है।
क्यों हो रहा था यह विरोध प्रदर्शन?
यह ‘लॉन्ग मार्च’ जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) द्वारा आयोजित किया गया था, जो कई मांगों को लेकर जारी प्रदर्शनों का हिस्सा था। छात्रों का मुख्य विरोध विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा हाल ही में एक पॉडकास्ट में यूजीसी मानदंडों के कार्यान्वयन, जेएनयूएसयू पदाधिकारियों के निलंबन और प्रस्तावित रोहित अधिनियम पर की गई टिप्पणियों को लेकर था। छात्र संघ इन्हीं मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए जेएनयू परिसर से शिक्षा मंत्रालय तक मार्च निकालना चाहता था।
पुलिस के अनुसार, जेएनयू प्रशासन ने पहले ही छात्रों को सूचित कर दिया था कि परिसर के बाहर किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद, लगभग 400-500 छात्र परिसर में एकत्र हुए और मार्च शुरू कर दिया।
पुलिस और छात्रों के अपने-अपने दावे
पुलिस और छात्रों के बीच टकराव तब बढ़ा जब प्रदर्शनकारियों ने मुख्य द्वार से बाहर निकलकर मंत्रालय की ओर बढ़ने का प्रयास किया। पुलिस ने एक बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
“स्थिति बिगड़ने पर परिसर के बाहर लगाए गए बैरिकेड क्षतिग्रस्त हो गए। प्रदर्शनकारियों ने बैनर और लाठियां फेंकीं, जूते फेंके और हमला भी किया। झड़प के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को दांत काट लिया गया। इससे मौके पर तैनात कई अधिकारी घायल हो गए।” — वरिष्ठ पुलिस अधिकारी
पुलिस ने यह भी कहा कि छात्रों द्वारा पुलिस के साथ दुर्व्यवहार के आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। वहीं, छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण मार्च को रोकने के लिए बर्बरतापूर्ण बल का इस्तेमाल किया। छात्रों का दावा है कि इस झड़प में कई छात्र घायल हुए और कुछ को पुलिस ‘अपुष्ट स्थानों’ पर ले गई।
शिक्षक संघ ने की कार्रवाई की निंदा
इस पूरे घटनाक्रम पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। जेएनयूटीए ने एक बयान जारी कर छात्रों पर पुलिस द्वारा “बल प्रयोग” की कड़ी निंदा की। संघ ने हिरासत में लिए गए छात्रों की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है। शिक्षक संघ ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई छात्रों को उनके लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने से रोकने के लिए थी।






