चुनाव आयोग को राहुल गांधी के आरोपों की जांच का देना चाहिए था आदेश, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त कुरैशी क्या बोले

राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनावों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 1 लाख से अधिक वोटों की चोरी का आरोप लगाया था।
चुनाव आयोग को राहुल गांधी के आरोपों की जांच का देना चाहिए था आदेश, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त कुरैशी क्या बोले

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने वोट चोरी के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि आयोग को राहुल गांधी के आरोपों की जांच का आदेश देना चाहिए था, न कि उनसे हलफनामा मांगकर आपत्तिजनक और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए था। कुरैशी ने रविवार को पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं और वह लाखों लोगों की आवाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेना और जांच करना आयोग का कर्तव्य था।

कुरैशी ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसे पेंडोरा का पिटारा खोलने और भट्टी के छत्ते में हाथ डालने जैसा बताया, जिससे आयोग की विश्वसनीयता को ठेस पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि अगर कोई शिकायत आती है, तो सामान्य प्रक्रिया यही होती है कि तुरंत जांच शुरू की जाए, ताकि निष्पक्षता न केवल बनी रहे बल्कि दिखे भी। कुरैशी ने यह भी जोड़ा कि आयोग को विपक्षी दलों का विश्वास जीतना चाहिए, क्योंकि वे सत्ता से बाहर होने के कारण अधिक ध्यान देने के हकदार हैं।

लोकसभा चुनावों के आंकड़ों का हवाला

राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनावों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 1 लाख से अधिक वोटों की चोरी का आरोप लगाया था। उन्होंने बिहार में मतदाता सूची के संशोधन के खिलाफ वोटर अधिकार यात्रा भी निकाली और बीजेपी और चुनाव आयोग के बीच सांठगांठ का दावा किया। कुरैशी ने कहा कि गांधी की ओर से इस्तेमाल किए गए हाइड्रोजन बम जैसे शब्द राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं, लेकिन उनकी शिकायतों की विस्तृत जांच होनी चाहिए, ताकि पूरे देश का भरोसा बना रहे।

मतदाता सूची में शामिल होने के लिए दस्तावेज

कुरैशी ने यह भी सवाल उठाया कि मतदाता सूची में शामिल होने के लिए दस्तावेजों की सूची से इलेक्टर्स फोटो आइडेंटिटी कार्ड (ईपीआईसी) को क्यों हटाया गया, जो स्वयं आयोग द्वारा जारी किया जाता है। उन्होंने कहा कि 30 साल की मेहनत से तैयार की गई मतदाता सूची को तीन महीने में नए सिरे से बनाना मुसीबत को न्योता देना है। सुप्रीम कोर्ट के दबाव में आयोग ने आधार का उपयोग शुरू किया, लेकिन कुरैशी ने आश्चर्य जताया कि कोर्ट ने ईपीआईसी के मुद्दे पर ध्यान क्यों नहीं दिया।

लेखक के बारे में
Follow Us :GoogleNews