पूर्व CJI गवई ने ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ विधेयक को बताया संवैधानिक, कहा- मूल ढांचे और संघीय व्यवस्था का उल्लंघन नहीं

एक देश, एक चुनाव विधेयक पर हुई जेपीसी की बैठक में पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विधेयक संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता है और इससे देश की संघीय या लोकतांत्रिक व्यवस्था पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
Former CJI BR Gavai

नई दिल्ली: देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने को लेकर चल रही बहस के बीच ‘एक देश, एक चुनाव’ की अवधारणा को एक बड़ा संवैधानिक समर्थन मिला है। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बी.आर. गवई ने गुरुवार को संसदीय समिति (JPC) के समक्ष स्पष्ट किया कि यह विधेयक संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता है।

जस्टिस गवई ने समिति को बताया कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लागू करने से केवल चुनाव कराने की प्रक्रिया में एक बार बदलाव होगा, लेकिन इससे चुनावी ढांचा या मतदाताओं के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे। उन्होंने इस प्रस्ताव को संवैधानिक रूप से पूरी तरह व्यावहारिक और संभव बताया। उन्होंने कहा कि संसद को इस तरह के संशोधन लाने का पूरा संवैधानिक अधिकार है।

सरकार की जवाबदेही पर असर नहीं

इस प्रस्ताव को लेकर एक बड़ी चिंता सरकार की जवाबदेही को लेकर जताई जाती है। इस पर जस्टिस बी.आर. गवई ने साफ किया कि अविश्वास प्रस्ताव जैसे महत्वपूर्ण संसदीय प्रावधान पहले की तरह ही बरकरार रहेंगे, इसलिए सरकार की जवाबदेही पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने याद दिलाया कि भारत में 1967 तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही होते थे, जो इस व्यवस्था की व्यावहारिकता को दर्शाता है।

“वन नेशन वन इलेक्शन बिल संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता। इससे संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर असर नहीं पड़ेगा। चुनावी ढांचा और मतदाताओं के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।”- जस्टिस बी.आर. गवई, पूर्व मुख्य न्यायाधीश

अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक

यह केवल कानूनी और संवैधानिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी फायदेमंद माना जा रहा है। इससे पहले दिसंबर में हुई जेपीसी की बैठक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पूर्व डिप्टी एमडी गीता गोपीनाथ ने इसका समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि बार-बार होने वाले चुनावों से देश में अनिश्चितता का माहौल बनता है, जिसका सीधा असर निजी निवेश पर पड़ता है।

गीता गोपीनाथ के अनुसार, आंकड़े बताते हैं कि चुनावी वर्षों में निजी निवेश में करीब 5 फीसदी की गिरावट देखी जाती है, जिसकी भरपाई बाद के वर्षों में भी पूरी नहीं हो पाती। एक साथ चुनाव होने से यह अनिश्चितता कम होगी, जिससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, सरकारी खर्च की दक्षता में भी सुधार होगा।

क्या है यह प्रस्ताव?

वन नेशन, वन इलेक्शन एक ऐसा प्रस्ताव है जिसके तहत पूरे देश में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के लिए चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश की गई है। इसके पीछे का मुख्य तर्क चुनावों पर होने वाले भारी खर्च को कम करना और देश को लगातार चुनावी मोड में रहने से बचाना है। इस पर गंभीरता से विचार करने के लिए 2 सितंबर 2023 को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था, जिसने अपनी रिपोर्ट में एक साथ चुनाव कराने का समर्थन किया है।

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