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दिल्ली AI समिट में यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन पर पूर्व जजों और अधिकारियों ने की निंदा, कहा- यह सोची-समझी नौटंकी थी

Written by:Shyam Dwivedi
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दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के शर्टलेस प्रदर्शन पर सियासी घमासान तेज हो गया है। 26 पूर्व न्यायाधीशों, 102 पूर्व नौकरशाहों और 149 सशस्त्र बलों के पूर्व अधिकारियों ने एक संयुक्त पत्र लिखकर इस घटना की कड़ी आलोचना की है और इसे राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के साथ विश्वासघात बताया है।
दिल्ली AI समिट में यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन पर पूर्व जजों और अधिकारियों ने की निंदा, कहा- यह सोची-समझी नौटंकी थी

नई दिल्ली: राजधानी के भारत मंडपम में हुए इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए शर्टलेस प्रदर्शन को लेकर विवाद गहरा गया है। अब इस मामले में 26 पूर्व न्यायाधीशों, 102 पूर्व नौकरशाहों और सशस्त्र बलों के 149 सेवानिवृत्त अधिकारियों सहित कुल 277 गणमान्य हस्तियों ने एक संयुक्त पत्र जारी कर इस कृत्य की कड़ी निंदा की है।

इन सभी हस्ताक्षरकर्ताओं ने इस प्रदर्शन को भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाने वाला और “सोची-समझी नौटंकी” करार दिया है। यह विरोध प्रदर्शन उस समय हुआ था जब कार्यक्रम में दुनिया भर के प्रमुख सीईओ, तकनीकी विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल थे, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।

‘राष्ट्रीय गरिमा के साथ घोर विश्वासघात’

पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं का यह व्यवहार राष्ट्रीय गरिमा के साथ एक घोर विश्वासघात था। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा, “कांग्रेस के इस प्रदर्शन ने वैश्विक तकनीकी और कूटनीतिक मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया है। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर इस तरह का प्रदर्शन देश की छवि को धूमिल करता है।”

पत्र में इस प्रदर्शन को निजी छवि को राष्ट्रीय प्रतिष्ठा से ऊपर रखने का एक प्रयास बताया गया। इसमें कहा गया कि यह एक बुद्धिहीन राजनीति का दयनीय प्रदर्शन था, जिसने किसी विशेष सरकार को नहीं, बल्कि पूरे देश को नुकसान पहुंचाया है।

लोकतांत्रिक विरोध बनाम सार्वजनिक अपमान

गणमान्य हस्तियों ने अपने पत्र में लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को एक वैध संवैधानिक अधिकार माना, लेकिन साथ ही एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी दी।

“लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन एक वैध संवैधानिक अधिकार बना हुआ है, लेकिन यह अराजकता या राष्ट्र के सार्वजनिक अपमान का बहाना नहीं बनना चाहिए।”

पत्र में यह भी कहा गया कि वास्तविक विरोध बौद्धिक दृढ़ता और संसदीय बहस के माध्यम से व्यक्त किया जाना चाहिए, न कि ऐसे कृत्यों से जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश को शर्मिंदा करें। सभी राजनीतिक दलों से यह भी अपील की गई कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों को अपने घरेलू और पक्षपातपूर्ण नाटक से मुक्त रखें। बीजेपी ने भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के इस बर्ताव की निंदा की है, जिसके बाद से इस पर राजनीतिक बहस जारी है।

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Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi
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