
भारत के दिग्गज व्यापारी गौतम अडाणी ने बारामती के विद्या प्रतिष्ठान में शरद चंद्र पवार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उद्घाटन किया। इस भव्य कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, सांसद सुप्रिया सुले, सुनेत्रा पवार, विद्या प्रतिष्ठान के पदाधिकारी और अलग-अलग क्षेत्रों के एक्सपर्ट व स्टूडेंट्स शामिल रहे। इस दौरान गौतम अडाणी ने युवाओं से AI के इस दौर में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। जानकारी दे दें कि गौतम अडाणी ने AI सहयोग को बढ़ाने के लिए बारामती के विद्या प्रतिष्ठान के साथ MoU पर हस्ताक्षर किए हैं।
दरअसल बारामती के शरद चंद्र पवार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के शुरू होने से युवाओं को वर्ल्ड-क्लास AI सेंटर में एजुकेशन प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। यहां रिसर्च, इंजीनियरिंग और एग्जीक्यूशन को इंटीग्रेटेड तरीके से आगे बढ़ाने की शिक्षा दी जाएगी।
शरद पवार की जमकर तारीफ की
वहीं कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गौतम अडाणी ने युवाओं को संदेश दिया कि उन्हें भविष्य के लिए तैयार रहना होगा। इसके अलावा उन्होंने शरद पवार के विजन की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि ‘मैं भाग्यशाली हूं कि पवार साहब को तीन दशकों से अधिक समय से जानता हूं और उनसे जो सीखा है, वह अनमोल है। शरद पवार की समझदारी, उनका प्यार और उनकी गहरी हमदर्दी सबसे गहरी छाप छोड़ती है। मेरे लिए वह हमेशा एक मार्गदर्शक रहे हैं। बारामती में दर्जनों बार आने के बाद भी मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि पवार साहब ने यहां जो हासिल किया है, वह सिर्फ स्थानीय विकास से कहीं ज्यादा है।’
कल के बीज एल्गोरिदम में बोए जाएंगे
Seeds of tomorrow will be sown in algorithms: Gautam Adani at AI centre launch in Baramati
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— ANI Digital (@ani_digital) December 28, 2025
इस दौरान गौतम अडाणी ने AI के भविष्य को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि पहले बीज धरती में बोए जाते थे, लेकिन अब कल के बीज एल्गोरिदम में बोए जाएंगे। मानव की प्रगति कभी भी सीधी रेखा में नहीं चलती, यह छलांग लगाकर आगे बढ़ती है। हर छलांग एक प्रौद्योगिकी क्रांति के साथ आती है, जो पहले समाज को अस्थिर करती है और फिर उसे पहले से कहीं अधिक ऊंचे स्तर पर दोबारा गढ़ती है। गौतम अडाणी ने युवाओं से देश निर्माण में योगदान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि आज हम चौथी औद्योगिक क्रांति के दौर में जी रहे हैं, जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस परिभाषित कर रहा है। वहीं उन्होंने यह भी बताया कि जहां पहले औद्योगिक क्रांतियों के दौरान नौकरियों के घटने का डर था, वहीं वास्तव में उससे कहीं ज्यादा नौकरियां पैदा हुई हैं।
4 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

