केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता गिरिराज सिंह के एक बयान ने इन दिनों राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी है। दरअसल उन्होंने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को लेकर एक ऐसा दावा किया, जिसने सोशल मीडिया पर भी हलचल मचा दी और राजनैतिक टीका-टिप्पणियों का दौर शुरू हो गया। गिरिराज सिंह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कहा कि असदुद्दीन ओवैसी आज नहीं तो कल यह स्वीकार कर लेंगे कि वे हिंदू हैं। इस बयान के बाद से ही राजनीतिक माहौल में गरमाहट आ गई है, और विभिन्न मंचों पर इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
दरअसल यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में बेरोजगारी, महंगाई, और NEET पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे चर्चा का विषय बने हुए हैं। बिहार के विकास जैसे अहम मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय, नेताओं द्वारा इस तरह के सांप्रदायिक बयान दिए जाने पर कई लोगों ने सवाल उठाए हैं, जो देश की प्राथमिकताओं पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। गिरिराज सिंह का यह बयान धार्मिक पहचान और धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ा माना जा रहा है।
असदुद्दीन ओवैसी ने दिया जवाब
वहीं AIMIM प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह के इस विवादित बयान पर सीधे-सीधे धार्मिक पहचान से जुड़ी टिप्पणी करने से परहेज किया। इसके बजाय, ओवैसी ने गिरिराज सिंह के बयान का जवाब देने के लिए टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को उठाया और इस सेक्टर की गंभीर परेशानियों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश देते हुए, आर्थिक चुनौतियों को धार्मिक बयानों पर तरजीह दी।
टेक्सटाइल हब का उल्लेख किया
ओवैसी ने स्पष्ट रूप से कहा कि देश में कॉटन यार्न यानी सूती धागे की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि के कारण पावरलूम और छोटे बुनकरों की स्थिति अत्यंत खराब हो रही है। उन्होंने विशेष रूप से वाराणसी, सूरत, मालेगांव और मुबारकपुर जैसे देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब का उल्लेख किया, जहां हजारों की संख्या में छोटे कारोबारी और मजदूर इस संकट से जूझ रहे हैं और उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।
असदुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा कि जहां एक ओर बाजार में तैयार कपड़ों की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर कच्चे माल की लागत में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। इस असमानता ने छोटे उद्योगों पर भारी दबाव डाला है, जिसके परिणामस्वरूप कई पावरलूम यूनिट्स बंद होने की कगार पर पहुँच गई हैं और बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ गई हैं। यह स्थिति इस महत्वपूर्ण सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
ओवैसी ने केंद्र सरकार से कई मांगें की
इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए ओवैसी ने केंद्र सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें की हैं। उन्होंने कहा कि घरेलू बाजार में सूती धागे की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कॉटन यार्न के निर्यात पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कच्चे कॉटन पर लगने वाली आयात शुल्क को हटाने की मांग की, जिससे उद्योग को आवश्यक राहत मिल सके और उत्पादन लागत कम हो।
चीन पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की भी मांग की
ओवैसी ने यह भी कहा कि कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए निर्यात प्रोत्साहन (एक्सपोर्ट इंसेंटिव) प्रदान किए जाने चाहिए ताकि भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी बन सकें। उन्होंने चीन से आने वाले सस्ते उत्पादों के कारण भारतीय उद्योग पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव को रेखांकित करते हुए चीन पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की भी मांग की, ताकि घरेलू कारोबार को प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके और स्थानीय उद्योगों को बचाया जा सके।
अपने जवाब के अंत में, असदुद्दीन ओवैसी ने गिरिराज सिंह को उनका शपथ ग्रहण और ‘शुद्ध अंतःकरण’ शब्द याद रखने की नसीहत दी। यह टिप्पणी गिरिराज सिंह के बयान पर एक अप्रत्यक्ष लेकिन गहरा पलटवार मानी जा रही है, जो संवैधानिक मूल्यों और नैतिक दायित्वों की ओर इशारा करती है, और इस बात पर जोर देती है कि नेताओं को राष्ट्रहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।






