
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक बड़ा बयान देते हुए राज्य में जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में असम में जनसंख्या का स्वरूप तेजी से बदला है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। सरमा ने इस बदलाव को अज्ञात बताते हुए इसकी गहन जांच और नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल असम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान देने योग्य है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जनसांख्यिकीय बदलाव के कारण सामाजिक और सांस्कृतिक संतुलन पर असर पड़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से अवैध प्रवास और जनसंख्या वृद्धि के कुछ खास पैटर्न पर चिंता जताई। सरमा ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और इसे नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने लोगों से इस संवेदनशील विषय पर एकजुट होकर विचार करने का आह्वान किया।
मूल निवासियों की संस्कृति
हिमंता बिस्वा सरमा ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने इस दिशा में कई नीतियां लागू की हैं, जिनका उद्देश्य स्थानीय समुदायों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने असम के मूल निवासियों की संस्कृति और पहचान को संरक्षित करने के लिए विशेष योजनाओं का जिक्र किया। साथ ही, उन्होंने केंद्र सरकार के समर्थन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय नीतियां भी इस दिशा में सहायक सिद्ध हो रही हैं।
सामाजिक हलकों में बहस छेड़ी
इस बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी है। जहां कुछ लोग मुख्यमंत्री के विचारों का समर्थन कर रहे हैं, वहीं कुछ ने इसे विवादास्पद करार दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में असम की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकता है। सरमा ने यह भी आश्वासन दिया कि उनकी सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और जनता के सहयोग से इस दिशा में सकारात्मक बदलाव लाएगी।
