गाजा में जारी गंभीर मानवीय संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे को लेकर जमात-ए-इस्लामी हिंद ने गहरी चिंता और निराशा व्यक्त की है। संगठन के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने एक बयान जारी कर कहा कि यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब गाजा अभूतपूर्व मानवीय तबाही का सामना कर रहा है, और यह भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति के सिद्धांतों के विपरीत है।
हुसैनी के अनुसार, प्रधानमंत्री का यह दौरा और वहां इजरायली नेतृत्व के साथ उनकी सार्वजनिक मुलाकातें बेहद निराशाजनक हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने हमेशा से ही दुनिया भर में दबे-कुचले और उत्पीड़ित लोगों का साथ दिया है, लेकिन इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री के रवैये ने इस परंपरा को कमजोर किया है।
‘लाखों भारतीयों को हुई निराशा’
जमात अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री के भाषणों और सार्वजनिक व्यवहार ने उन लाखों भारतीयों को आहत किया है जो न्याय की आवाज और पीड़ितों के रक्षक के तौर पर भारत की भूमिका को सम्मान की नजर से देखते हैं। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के प्रतिष्ठित मानवाधिकार संगठन और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी गाजा में इजरायल की कार्रवाइयों को युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध बता रहे हैं, ऐसे में भारत की तरफ से स्पष्ट निंदा का अभाव पीड़ादायक है।
“भारत की आत्मा हमेशा दबे-कुचले लोगों के साथ खड़ी रही है, चाहे उनका धर्म, भूगोल या राजनीतिक फायदा कुछ भी हो। भारत की सभ्यता की सोच, जो उसके आजादी के आंदोलन और संवैधानिक मूल्यों में दिखती है, उसके नेतृत्व से अन्याय के खिलाफ सच्चाई और हिम्मत से बोलने की अपील करती है।” — सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी
भारत की नैतिक साख पर सवाल
हुसैनी ने भारत की ऐतिहासिक भूमिका को याद दिलाते हुए कहा कि देश ने हमेशा रंगभेद, औपनिवेशिक कब्जे और नस्लीय भेदभाव का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने कहा, “दुनिया में भारत की नैतिक हैसियत सिर्फ रणनीतिक हितों पर नहीं, बल्कि न्याय, दया और एकजुटता जैसे सभ्यतागत मूल्यों पर बनी है। देश के लोगों को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री इस विरासत को बनाए रखेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि फिलिस्तीनी भूमि पर इजरायल का लंबा कब्जा और गाजा में हो रहा विनाश केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक गंभीर नैतिक संकट है। एक तरफ इजरायली नेतृत्व के साथ गर्मजोशी दिखाना और दूसरी तरफ फिलिस्तीनियों की पीड़ा पर मुखर न होना, उन लाखों भारतीयों के लिए दुख का कारण बना है जिनकी अंतरात्मा हमेशा न्याय के पक्ष में रही है।
‘नैतिक आवाज ही भारत की असली ताकत’
बयान के अंत में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत की आजादी की लड़ाई स्वयं अन्याय के खिलाफ एक नैतिक संघर्ष थी। हुसैनी ने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी आर्थिक या सैन्य शक्ति में नहीं, बल्कि उसकी नैतिक आवाज में निहित है और इसी आवाज को देश के नेतृत्व का मार्गदर्शन करते रहना चाहिए।






