
Supreme Court remarks on police lathi charge
NEET पेपर लीक के विरोध को लेकर जंतर मंतर पर हुए आंदोलन में संसद पर प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, आज इस मामले में CJI सूर्यकांत ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सिर्फ आंदोलन/प्रदर्शन की वजह से लाठीचार्ज को, पुलिस ज्यादती को सही नहीं ठहराया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी तब की जब देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग से जुड़ी नई याचिकाओं का उल्लेख उसके सामने किया गया, इनमें से एक याचिका उन छात्रों के समूह ने दायर की है, जिनका आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने मौखिक रूप से कहा हम इन सभी मामलों को कल 28 जुलाई को सूचीबद्ध करेंगे।
शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार एक संवैधानिक गारंटी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार एक संवैधानिक गारंटी है। CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि देश भर में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को आसान बनाना जरूरी है और अधिकारियों को असामाजिक तत्वों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में सक्षम बनाना भी जरूरी है लेकिन इन सबके लिए एक समान प्रोटोकॉल की जरुरत है।
पुलिसकर्मियों पर हमले भी चिंताजनक
हालांकि अदालत ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमले के आरोपों पर भी चिंता जताई। एक वकील द्वारा उग्र भीड़ द्वारा पुलिसकर्मियों पर हमले का मुद्दा उठाया तो जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा पुलिस को चोट पहुँचना भी उतनी ही चिंता की बात है। हम राज्य से जवाब मांग सकते हैं कि पर्याप्त सुरक्षा उपाय क्यों नहीं किए गए?
शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए एक प्रोटोकॉल जरूरी
CJI ने कहा जब कोई शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन करना चाहता है, तो एक प्रोटोकॉल होना चाहिए। उसके लिए उचित जगह होनी चाहिए। इस मामले में कोई बाधा नहीं है। लेकिन अगर कोई असामाजिक तत्व है, तो उससे निपटा जा सकता है। कोर्ट ने आगे कहा कि इस मुद्दे के लिए पूरे देश में एक जैसा नज़रिया अपनाने की ज़रूरत है और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी गाइडलाइंस बनाने की बात कही।
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