दिल्ली की सियासत एक बार फिर शराब नीति मामले को लेकर गरमा गई है। दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने अरविंद केजरीवाल पर सीधा हमला बोलते हुए उन पर ‘ओवरएक्टिंग’ करने और जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह मामला अभी दिल्ली हाई कोर्ट में विचाराधीन है और पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन केजरीवाल खुद को निर्दोष साबित करने में लगे हैं।
कपिल मिश्रा ने जोर देकर कहा कि जब अरविंद केजरीवाल सरकार में थे, तब भी वह जनता को गुमराह करते थे और आज भी वही कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता 11 साल तक परेशान रही और अब सच्चाई सबके सामने आ रही है।
‘सही थी तो वापस क्यों ली शराब नीति?’
कपिल मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कई तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर आम आदमी पार्टी की शराब नीति इतनी ही अच्छी और पारदर्शी थी, तो जैसे ही इस पर सवाल उठे और शिकायतें हुईं, उसे तुरंत वापस क्यों ले लिया गया? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच शुरू होते ही सबूत मिटाने के लिए कई मोबाइल फोन तोड़े गए थे।
“शराब नीति मामले में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों ने गंभीर टिप्पणियां की हैं। इसके बावजूद केजरीवाल ने खुद को निर्दोष बताया। अगर शराब नीति सही थी तो शिकायत होते ही उसे वापस क्यों लिया गया?” — कपिल मिश्रा
यह मामला साल 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसमें दिल्ली सरकार ने शराब कारोबार में निजी कंपनियों की भूमिका बढ़ा दी थी। बाद में इस नीति पर कुछ चुनिंदा कारोबारियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगे, जिसके बाद सीबीआई और ईडी ने जांच शुरू की। इसी मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भी गिरफ्तार किया गया था।
CAG रिपोर्ट और कमीशन का जिक्र
मिश्रा ने अपने आरोपों को पुख्ता करने के लिए CAG रिपोर्ट का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा, “थोक व्यापारियों का कमीशन 5 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 12 प्रतिशत कर दिया गया था।” उन्होंने बताया कि सीएजी की रिपोर्ट में भी इस नीति के कारण सरकारी खजाने को राजस्व का नुकसान होने की बात कही गई थी। हालांकि, आम आदमी पार्टी इन सभी आरोपों को हमेशा से राजनीति से प्रेरित बताती रही है और दावा करती है कि कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है।
‘जनता की अदालत सबसे बड़ी’
शराब नीति के अलावा कपिल मिश्रा ने दिल्ली के अन्य मुद्दों पर भी केजरीवाल सरकार को घेरा। उन्होंने दिल्ली की सड़कों, पानी, सीवर, स्कूल, अस्पताल और यमुना की सफाई की खराब स्थिति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 11 वर्षों में दिल्ली के हालात सुधरने के बजाय और बिगड़े हैं। मिश्रा ने कहा, “जनता की अदालत सबसे बड़ी होती है और दिल्ली की जनता ने हालिया चुनावों में अपना जवाब दे दिया है।” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों में, खासकर दिल्ली, पंजाब और गुजरात की राजनीति में एक प्रमुख हथियार बना रहेगा।






