नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्यसभा में दिए गए भाषण पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तीखा हमला बोला है। खरगे ने पीएम के 20 मिनट के बयान को भ्रम फैलाने वाला और जवाब से ज्यादा सवाल खड़े करने वाला बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के जरिए सरकार की विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए।
खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह बयान 25 दिन की देरी से आया है, जबकि देश एक गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने सरकार की तैयारियों पर भी सवालिया निशान लगाया और पूछा कि क्या एक बार फिर 140 करोड़ भारतीयों को अपने हाल पर छोड़ दिया जाएगा।
खरगे के 3 सवाल, सरकार को घेरा
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से तीन बुनियादी सवालों पर स्पष्ट जवाब की मांग की है, जिससे देश की मौजूदा स्थिति और सरकार की रणनीति पर तस्वीर साफ हो सके।
1. विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता: खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अपने ‘अस्थिर और बदलते’ कूटनीतिक रुख से भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को बिगाड़ दिया है, जो दशकों से हमारी विदेश नीति का स्तंभ रही है। उन्होंने पूछा, “प्रधानमंत्री इस स्पष्ट बदलाव के बारे में संसद और देश को विश्वास में लेने में क्यों विफल रहे और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को बहाल करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं?”
2. होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाज: खरगे ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय जहाजों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, “लगभग 1,100 नाविकों के साथ भारतीय ध्वज वाले करीब 30-40 जहाज वहां फंसे हुए हैं, जिनमें 10 हजार करोड़ रुपये का माल लदा है। पीएम और विदेश मंत्री की ईरानी नेतृत्व से बातचीत के बावजूद हम सुरक्षित मार्ग क्यों नहीं सुनिश्चित कर पाए, जबकि चीन, रूस और जापान जैसे देशों को सुरक्षित पारगमन मिल रहा है?”
3. ऊर्जा आयात और महंगाई: सरकार के ऊर्जा आयात को 27 से 41 देशों तक विस्तारित करने के दावे पर सवाल उठाते हुए खरगे ने पूछा, “अगर ऐसा है, तो वर्तमान में कौन से देश भारत को एलएनजी, एलपीजी और कच्चे तेल की आपूर्ति कर रहे हैं? और यदि आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाई गई है, तो लोगों को अभी भी लंबी कतारों, कालाबाजारी और कीमतों में भारी वृद्धि का सामना क्यों करना पड़ रहा है?”
कोविड की याद दिलाकर सरकार पर निशाना
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा मौजूदा स्थिति की तुलना कोविड जैसी स्थिति से करने पर भी खरगे ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि देश महामारी के दौरान हुई उस भयावह पीड़ा को नहीं भूला है, जब चार लाख से अधिक लोगों की जान चली गई थी और नागरिक ऑक्सीजन जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे थे।
“क्या प्रधानमंत्री अब यह कहना चाह रहे हैं कि 140 करोड़ भारतीयों को एक बार फिर अपने हाल पर छोड़ दिया जाए, क्योंकि देश ऊर्जा संकट, खाद्य, उर्वरक, एमएसएमई और महंगाई के बढ़ते दबावों का सामना कर रहा है?”- मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस अध्यक्ष
खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री का बयान बहुत देर से आया है और यह जवाब देने के बजाय कहीं अधिक सवाल खड़े करता है।
संकट से निपटने के लिए सरकार का कदम
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी जंग के संभावित दीर्घकालिक प्रभावों से निपटने के लिए सात अधिकार प्राप्त समूहों के गठन की घोषणा की है। उन्होंने राज्यों से भी आग्रह किया कि वे इस संकट से निपटने के लिए ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ केंद्र के साथ मिलकर काम करें।
The 20-minute statement by Prime Minister Modi in the Rajya Sabha was, at best, an exercise in obfuscation.
We seek clear answers to three fundamental questions:
First, through his inconsistent and swinging diplomatic posture, the Prime Minister appears to have altered the…
— Mallikarjun Kharge (@kharge) March 24, 2026





