
15 अगस्त (शुक्रवार) को दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित ऐतिहासिक हुमायूं के मकबरे में एक बड़ा हादसा हो गया। यहां फतेह शाह दरगाह का एक हिस्सा अचानक गिर गया। हादसे के वक्त बारिश हो रही थी, और कुछ लोग दरगाह के पास पीछे की तरफ बने परिसर में रुक गए थे।
अचानक हुए इस हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 3 महिलाएं और 2 पुरुष शामिल हैं। इसके अलावा लगभग 10 से 12 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को तुरंत एम्स और एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है मकबरा
हुमायूं का मकबरा दिल्ली का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल है। यहां छुट्टियों और खास मौकों पर बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इस मकबरे की देखरेख और संरक्षण का जिम्मा संभालती है।
घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या दरगाह के हिस्से की मरम्मत और सुरक्षा पर सही से ध्यान दिया गया था? प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। विशेषज्ञों की टीम यह जांच करेगी कि बारिश के कारण दीवार कैसे गिरी और क्या इसमें लापरवाही हुई है।
जानिए हुमायूं के मकबरे का इतिहास
हुमायूं का मकबरा, जिसे “मकबरा-ए-हुमायूं” भी कहा जाता है, मुगल सम्राट हुमायूं की याद में उनकी पहली पत्नी बेगा बेगम (हाजी बेगम) ने बनवाया था। इसका निर्माण 1569-70 में पूरा हुआ था।
इस खूबसूरत स्मारक को फारसी वास्तुकार मिर्क मिर्ज़ा गियास और उनके बेटे सय्यद मुहम्मद ने डिज़ाइन किया था। यह मकबरा अपने समय की सबसे भव्य और अनोखी इमारतों में से एक मानी जाती है, जिसे देखने हर साल लाखों लोग आते हैं।
विश्व धरोहर स्थल और बागों वाला पहला मकबरा
हुमायूं का मकबरा भारतीय उपमहाद्वीप का पहला बागों वाला मकबरा है, जिसे ‘चारबाग़’ शैली में बनाया गया है। यह मकबरा लाल बलुआ पत्थर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने वाली पहली इमारत भी है, जिससे इसकी खूबसूरती और बढ़ जाती है।
1993 में इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। इसके बाद इसमें बड़े स्तर पर संरक्षण और जीर्णोद्धार का कार्य किया गया। इस परिसर में हुमायूं के मकबरे के अलावा कई अन्य ऐतिहासिक स्मारक भी हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है ईसा खान नियाज़ी का मकबरा, जो कि एक अफगान सरदार थे और शेरशाह सूरी के दरबार में थे।
