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अयोध्या: राम मंदिर के शिखर पर पीएम मोदी संग मोहन भागवत ने फहराया धर्म ध्वज, कहा ‘500 वर्षों का संकल्प आज पूरा हुआ’

Written by:Banshika Sharma
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने विवाह पंचमी के अवसर पर अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया। उन्होंने इसे 500 वर्षों के संघर्ष और संकल्प की पूर्ति बताते हुए कहा कि मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया अब पूर्ण हो गई है।
अयोध्या: राम मंदिर के शिखर पर पीएम मोदी संग मोहन भागवत ने फहराया धर्म ध्वज, कहा ‘500 वर्षों का संकल्प आज पूरा हुआ’

अयोध्या। विवाह पंचमी के पावन अवसर पर अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का एक और ऐतिहासिक अध्याय पूरा हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मंगलवार को मंदिर के शिखर पर विधि-विधान से धर्म ध्वज फहराया। इस अवसर को उन्होंने कृतार्थता और सार्थकता का दिवस बताते हुए कहा कि यह उन अनगिनत लोगों के सपनों के साकार होने का क्षण है, जिन्होंने इस मंदिर के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

अपने संबोधन में भागवत ने मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों को याद करते हुए कहा कि आज अशोक सिंघल जी, महंत रामचंद्र दास जी महाराज, डालमिया जी समेत कितने ही संत, गृहस्थ और विद्यार्थियों की आत्मा को शांति मिली होगी। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के लंबे इंतजार और पिछले 30 वर्षों के सतत प्रयासों के बाद यह सपना साकार हुआ है।

“आज मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो गई। ध्वजारोहण भी हो गया। निश्चित तौर पर यह एक ऐतिहासिक व पूर्णत्व का क्षण है। आज का दिन हमारे उस संकल्प की पुनरावृत्ति का दिवस है, जिसे हमारे पूर्वजों ने हमें दिया है।” — डॉ. मोहन भागवत, सरसंघचालक, आरएसएस

धर्म ध्वज के प्रतीक और संदेश

भागवत ने ध्वज के महत्व को समझाते हुए कहा कि यह भगवा ध्वज रामराज्य का प्रतीक है, जो कभी अयोध्या में फहराता था और विश्व को सुख-शांति प्रदान करता था। उन्होंने बताया, “ध्वज धर्म का प्रतीक होता है। उसी धर्म का प्रतीक भगवा रंग इस धर्म ध्वज का रंग है।”

उन्होंने ध्वज पर अंकित प्रतीकों का भी अर्थ स्पष्ट किया। भागवत ने कहा, “ध्वज पर कोविदार वृक्ष का चिह्न रघुकुल की परंपरा से जुड़ा है। वृक्ष सत्पुरुषों के समान होते हैं, जो स्वयं धूप में रहकर सबको छाया देते हैं और फल दूसरों को बांट देते हैं।” इसके अलावा, सूर्य का चिह्न धर्म के तेज और कभी न रुकने वाले संकल्प का प्रतीक है, जो सभी बाधाओं के बावजूद अपना कर्तव्य पूरा करता है।

‘भारत के चरित्र से सीखेगी दुनिया’

सरसंघचालक ने भारत की वैश्विक भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि राम मंदिर का निर्माण केवल एक ढांचा खड़ा करना नहीं, बल्कि उन जीवन मूल्यों की पुनर्स्थापना है। उन्होंने कहा कि अब हमें ऐसा भारत खड़ा करना है, जो संपूर्ण विश्व को सुख-शांति का मार्ग दिखाए और विकास का सुफल बांटे।

“एतद्देशप्रसूतस्य सकाशादग्रजन्मनः, स्वं स्वं चरित्रं शिक्षेरन् पृथिव्यां सर्वमानवाः। अर्थात इस देश में जन्मे लोग ऐसा जीवन जिएं कि दुनिया के सभी मानव उनके चरित्र से जीवन की विद्या सीखें।” — डॉ. मोहन भागवत

उन्होंने कहा कि रामलला के विराजमान होने के बाद अब उनसे प्रेरणा लेकर हमें कार्य की गति को आगे बढ़ाना है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने मराठी संत रामदास स्वामी के श्लोक का जिक्र करते हुए कहा कि जैसा सपना देखा गया था, मंदिर उससे भी कहीं अधिक भव्य और सुंदर बना है।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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