7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस, प्रधानमंत्री मोदी ने जारी किया वीडियो संदेश, देशवासियों से की खास अपील

भारत में 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (National Handloom Day) मनाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश शेयर किया है। उन्होंने देशवासियों से अपील की है कि राष्ट्रीय हैंडलूम डे उत्साह और उमंग के साथ मनाना हैं।
PM Modi

भारत में प्रतिवर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस यानी नेशनल हैंडलूम डे (National Handloom Day) मनाया जाता है। इसी दिन 1905 में कोलकाता के टाउनहॉल में एक जनसभा में स्वदेशी आंदोलन की नींव रखी गई थी। भारत सरकार इसी की याद में हर वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के तौर पर मनाता है। हथकरघा दिवस को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को एक वीडियो संदेश भी जारी किया है।

बता दें कि हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर में हुए छात्रों के आंदोलन खत्म होने के बाद पीएम मोदी आए दिन वीडियो जारी कर युवाओं एवं देशवासियों को संदेश दे रहे हैं। इस बीच, 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के उपलक्ष्य में भी पीएम मोदी ने एक बार फिर देशवासियों के नाम वीडियो संदेश जारी किया है।

नेशनल हैंडलूम डे पर प्रधानमंत्री का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो संदेश में अपने संबोधन की शुरुआत ‘साथियों’ कहर की। उन्होंने कहा कि साथियों.. 7 अगस्त 1905 को हमें भूलना नहीं है। इस दिन देश की आजादी के लिए स्वदेशी आंदोलन प्रारंभ हुआ था और देश के वीर नागरिकों द्वारा क्रांति की नींव डाली गई थी। देशवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ एक बहुत बड़ी लड़ाई लड़ी थी।

पीएम मोदी की देशवासियों से अपील

पीएम मोदी ने कहा​ कि पिछले ही सप्ताह देश के नागरिकों ने मित्रता दिवस मनाया। मैं आज आप सभी से आग्रह करता हूं कि 7 अगस्त यानि राष्ट्रीय हैंडलूम डे भी उत्साह और उमंग के साथ मनाना हैं। उन्होंने कहा​ कि राष्ट्रीय हैंडलूम डे मनाने का मतलब है हर बुनकर परिवार, जो अपने हाथों से बुनकर कपड़े बनाता है। हथकरघा से कई प्रकार की क्वालिटी से भरे कपड़े हम तक पहुंचाते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि हम सभी का काम है कि आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए हमारे छोटे-छोटे गरीब परिवारों को भी आर्थिक रूप से समृद्ध करना। आइए हम स्वयं हैंडलूम से कुछ न कुछ खरीदें और उसका एक वीडियो भी बनाएं। साथ ही उस वीडियो को सोशल मी​डिया के माध्यम से देश दुनिया तक उसे फैलाएं। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारे बुनकर भाई बहनों के सर्मथ्य का परिचय दुनिया को भी पता चले।

सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी है भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा

भारत की हथकरघा परंपरा की जड़ें इतिहास में दूर तक फैली हैं, जिसके प्राचीन निशान सिंधु घाटी सभ्यता तक मिलते हैं। कताई और बुनाई का उल्लेख ऋग्वेद, रामायण और महाभारत में मिलता है। इन ग्रंथों में और कौटिल्य के साहित्य में भारतीय कपास और रेशम की उत्तम गुणवत्ता का वर्णन मिलता है। सदियों से बुनाई की कला और तकनीक एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती रही है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट प्रथाओं के माध्यम से इन परंपराओं का विकास हुआ है। वर्ष 2015 में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की स्थापना ने इस दीर्घकालिक विरासत को समर्पित राष्ट्रीय मंच प्रदान किया।

हथकरघा बुनाई आज भी पारंपरिक शिल्प और घरेलू उद्यम है। इसकी पहचान बुनकर, इस क्षेत्र और प्रत्येक वस्त्र के निर्माण में निहित ज्ञान से गहराई से जुड़ी हुई है। इसके साथ ही हथकरघा बुनाई के आसपास का परिदृश्य लगातार विकसित हो रहा है।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
Shyam Dwivedi

7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi →
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