दिल्ली की सड़कों पर अनुशासन और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली सरकार ने ट्रैफिक चालानों के निपटारे हेतु एक अभूतपूर्व और व्यवस्थित प्रक्रिया लागू करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि अब लापरवाही या नियमों की अनदेखी के लिए कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। इस नई व्यवस्था के तहत, चालान से बचना संभव नहीं होगा और प्रत्येक नागरिक के लिए तय समय सीमा में उसका निपटारा अनिवार्य होगा। यह पहल सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने, अनुशासन को बढ़ावा देने और डिजिटल पारदर्शिता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नए नियमों के अनुसार, अब किसी भी चालान को सीधे अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी, जिससे प्रक्रिया में एकरूपता और गति आएगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति एक वर्ष की अवधि में पांच या उससे अधिक बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे गंभीर श्रेणी का दोषी माना जाएगा। ऐसे मामलों में, उसके ड्राइविंग लाइसेंस के निलंबन या स्थायी अयोग्यता जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। यह प्रावधान बार-बार नियम तोड़ने वालों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से लाया गया है।
कैमरों और डिजिटल सिस्टम से स्वतः बनेगा ई-चालान
चालान जारी करने की प्रक्रिया में अब पूर्ण आधुनिकीकरण किया गया है। रेखा गुप्ता ने बताया कि पुलिस अधिकारी अब चालान को कागजी प्रारूप के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक रूप में भी जारी कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, शहर भर में लगाए गए कैमरों और अन्य डिजिटल निगरानी प्रणालियों की मदद से चालान स्वतः ही तैयार हो जाएंगे। जिन व्यक्तियों का चालान काटा गया है, उन्हें तीन दिनों के भीतर ऑनलाइन माध्यम से और पंद्रह दिनों के भीतर भौतिक नोटिस के माध्यम से सूचित किया जाएगा, ताकि वे समय पर आवश्यक कार्रवाई कर सकें।
सभी जारी किए गए चालानों का विस्तृत रिकॉर्ड एक ऑनलाइन पोर्टल पर सुरक्षित रूप से उपलब्ध रहेगा। मुख्यमंत्री ने सभी वाहन चालकों को सलाह दी है कि वे अपने ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण (आरसी) पर दर्ज मोबाइल नंबर और पते को अद्यतन करवा लें, ताकि उन्हें चालान संबंधी किसी भी असुविधा का सामना न करना पड़े और समय पर सूचना प्राप्त हो सके।
तय अवधि में भुगतान या आपत्ति दर्ज करना होगा अनिवार्य
मुख्यमंत्री के अनुसार, चालान जारी होने के बाद संबंधित व्यक्ति के पास 45 दिनों का समय होगा। इस अवधि के भीतर, वह या तो चालान का भुगतान कर सकता है या ऑनलाइन पोर्टल पर आवश्यक सबूतों के साथ अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। यदि इन 45 दिनों के भीतर कोई भी कदम नहीं उठाया जाता है, तो चालान स्वतः स्वीकृत मान लिया जाएगा और उसके बाद 30 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा।
यदि किसी व्यक्ति द्वारा दर्ज की गई आपत्ति को अधिकारी द्वारा खारिज कर दिया जाता है, तो उस व्यक्ति के पास दो विकल्प होंगे: या तो वह 30 दिनों के भीतर चालान की पूरी राशि का भुगतान कर दे, या फिर चालान की राशि का 50% जमा करके मामले को अदालत में ले जा सकता है। यह व्यवस्था नागरिकों को न्याय प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है, जबकि अनावश्यक देरी को भी रोकती है।
निर्धारित समयसीमा पार होने की स्थिति में, चालान को स्वीकार मान लिया जाएगा और भुगतान 15 दिनों के भीतर करना होगा। इसके साथ ही, सभी आदेशों को 30 दिनों के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना भी अनिवार्य रहेगा, जिससे प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बनी रहे।
समयसीमा चूकी तो होगी कड़ी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समयसीमा चूकने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में, प्रतिदिन इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजे जाएंगे। यदि चालान का भुगतान फिर भी नहीं किया जाता है, तो व्यक्ति के नाम से जुड़े सभी वाहन संबंधी कार्य जैसे वाहन कर का भुगतान, ड्राइविंग लाइसेंस का नवीकरण या वाहन का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से रोक दिए जाएंगे। संबंधित वाहन को पोर्टल पर ‘नॉट टू बी ट्रांजैक्टेड’ (लेन-देन योग्य नहीं) के रूप में चिह्नित किया जाएगा, और आवश्यकता पड़ने पर वाहन को जब्त भी किया जा सकेगा। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि अब चालान केवल वाहन के पंजीकृत मालिक के नाम पर ही जारी होगा, और अपराध की सूचना एसएमएस या ईमेल के माध्यम से दी जाएगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दोहराया कि यह नई प्रणाली डिजिटल रूप से सशक्त, पारदर्शी और जवाबदेही तय करने वाली है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इससे न केवल ट्रैफिक कानूनों का पालन मजबूत होगा, बल्कि दिल्ली की सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। उन्होंने दिल्लीवासियों से विनम्र अपील की कि वे नियमों का पालन करें, अपने चालानों का समय पर निपटारा करें और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपना कर्तव्य निभाएं, ताकि दिल्ली की सड़कें सभी के लिए सुरक्षित बन सकें।






