
Old Pension Scheme 2023 : राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में पुरानी लागू होने के बाद आगामी लोकसभा चुनाव से पहले देश में एक बार फिर पुरानी पेंशन योजना की बहाली की चर्चाएं तेज हो चली है। ओपीएस की बहाली को लेकर एक बार फिर कर्मचारी संगठन लामबंद होकर दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन करने की तैयारी में है।उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ और संयुक्त संघर्ष संचालन समिति (एस-4) के पदाधिकारियों 30 अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन करने और तीन नंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन करने का एलान किया है।
30 अक्टूबर को दिल्ली में आंदोलन
दरअसल, ओपीसी बहाली की मांग उठाते हुए संयुक्त संघर्ष संचालन समिति (एस-4) ने 30 अक्तूबर से चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। वही ओपीएस समाप्त करने, संविदा, मानदेय, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के नियमितीकरण का भी मुद्दा उठाया है। समिति की मांग है कि संविदा कर्मियों व शिक्षकों के नियमितीकरण व न्यूनतम वेतन 18 हजार करने, निजीकरण प्रथा समाप्त कर चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की भर्ती पर लगी रोक हटाई जाए। सम्मेलन में घोषित आंदोलन को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद समेत विभिन्न कर्मचारी-शिक्षक संगठनों ने समर्थन भी दिया है।
3 नवंबर को दिल्ली में महारैली
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ की ओर से तीन नवंबर को दिल्ली में पुरानी पेंशन बहाली समेत कई मांगों के समर्थन में महारैली होगी। महारैली के बाद भी सरकार नहीं चेती तो कर्मचारी कड़े फैसले लेने को मजबूर होंगे। महारैली में कर्मचारियों-शिक्षकों को पुरानी पेंशन के दायरे में लाने, आठवें वेतन आयोग के गठन, संविदा व्यवस्था समाप्त करने, कोरोना काल में फ्रीज डीए व डीआर को बहाल करने समेत कई मांगें उठाई जाएंगी। महारैली में केंद्र व राज्य सरकार के कर्मचारी-शिक्षक व आउटसोर्सिंग कार्मिक भी शामिल होंगे।
ऐसे चलेगा पूरा आंदोलन
- संगठन का कहना है कि पुरानी पेंशन बहाली के लिए 30 अक्तूबर से दो नवंबर तक सांसदों के नाम खुला पत्र जारी कर उन्हें दिया जाएग।
- 7 नवंबर को जिला मुख्यालयों पर धरना देकर राज्यपाल व सीएम के नाम ज्ञापन दिया जाएगा।
- 29 नवंबर को जिला मुख्यालय पर मोटरसाइकिल रैली व मंडल मुख्यालयों पर सम्मेलन होगा।
- 15 दिसंबर को पीएम, वित्त मंत्री व केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजा जाएगा और लखनऊ में विधान भवन के चारों ओर मानव श्रृंखला बनाई जाएगी।
- 16 जनवरी को उत्तर प्रदेश विधान भवन पर प्रदर्शन करेंगे।
जानिए क्या अंतर है OPS और NPS में
- OPS में सरकारी कर्मचारी के रिटायर होने के बाद आखिरी मूल वेतन और महंगाई भत्ते की आधी रकम बतौर पेंशन ताउम्र सरकार के राजकोष से दी जाती है। OPS में हर साल दो बार महंगाई भत्ता भी बढ़कर मिलता है,पेंशन पाने वाले सरकारी कर्मचारी की मौत होने पर उसके परिवार के पेंशन दिए जाना भी ओपीएस में शामिल हैं।
- NPS एक कंट्रीब्यूटरी स्कीम है, जिसमें कर्मचारियों को अपने वेतन का दस प्रतिशत हिस्सा देना होता है। सरकार कर्मचारी के एनपीएस खाते में 14% भाग डालती है।नई पेंशन योजना के तहत सरकारी कर्मचारी को अपनी पेंशन में मूल वेतन का 10 फीसदी देना होता है और इसमें राज्य सरकार केवल 14% का ही योगदान देती है।
- पेंशन कमीशन के लागू होने पर पेंशन रिवाइज्ड होने का फायदा भी रिटायर कर्मचारी को मिलता है।OPS में कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद 20 लाख रुपए तक की ग्रेच्युटी मिलती है।
- नई पेंशन स्कीम के तहत सेवानिवृत्ति पर पेंशन पाने के लिए एनपीएस फंड का 40 फीसदी निवेश करना होता है। सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित पेंशन की गारंटी नहीं होती।एनपीएस शेयर बाजार पर आधारित है। इसमें महंगाई भत्ते का प्रावधान शामिल नहीं है।NPS में सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर उनके परिजनों को कुल वेतन का 50 फीसदी पेंशन के तौर पर देने का प्रावधान है।
- OPS के विपरीत नई पेंशन स्कीम में रिटायरमेंट पर शेयर बाजार के अनुसार जो भी पैसा मिलेगा,आपको उसपर टैक्स देना होता है।OPS में कर्मचारी के रिटायरमेंट पर GPF के ब्याज पर उसे किसी प्रकार का इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता।
- NPS में रिटायरमेंट के समय ग्रेच्युटी का कोई स्थायी प्रावधान नहीं है।न्यू पेंशन स्कीम (NPS) में 6 महीने के उपरांत मिलने वाला महंगाई भत्ता (DA) लागू नहीं होता है।
12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

